भगवान का वांग्मय रूप है श्रीमद् भागवत - आचार्य गौतम

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भगवान का वांग्मय रूप है श्रीमद् भागवत - आचार्य गौतम


नवादा, 23 फ़रवरी(हि.स.)। कथावाचक आचार्य गौतम जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान का वांग्मय रूप है। कथा सुनने से कई जन्मों का पाप नष्ट होकर मनुष्य परमधाम को पहुंच जाता है।

वह यह बातें सोमवार को नवादा जिले के अकबरपुर थाने के पहाड़पुर गांव में पर्यावरणविद् राम प्रताप शरण की ओर से आयोजित शतरुद्र महायज्ञ में प्रवचन करते हुए कहीं।

उन्होंने संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा वाचन करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद् भागवत में कर्म के फल पर विशद व्याख्या की है। कर्म फल से कोई इंसान वंचित नहीं रह सकता है, लेकिन ईश्वर भक्ति कर इंसान समस्त पापों से छूटकर मोक्ष प्राप्ति कर आवागमन के दुखद बंधन से मुक्त हो सकता है।

उन्होंने भागवत महापुराण की कथा सुनाते हुए कहा कि तुम किसी बेहतर की तलाश में मत भटको,बल्कि तुम इतनी बेहतर बन जाओ की जो भी बेहतर की खोज कर रहा है उसकी तलाश पूरी हो जाए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने 200 साल पुरानी मंदिर के जीर्णोद्धार के अवसर पर ग्रामीणों के सौजन्य से श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का आयोजन कर महापुण्य का काम किया है। उन्होंने कहा कि कथा स्थल साक्षात भगवान श्री कृष्ण के वास का स्थल होता है,इसलिए जो भी श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। यहाँ मन-तन से भगवान के चरणों में बैठकर अमृत वचन का पान करें,तभी उनका उद्धार संभव है।

उन्होंने पर्यावरणविद् राम प्रताप शरण सहित ग्राम वासियों की इस कथा आयोजन के लिए प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की कथा हर गांव में होनी चाहिए, तभी हम भारतीय संस्कृति की रक्षा करने में सक्षम हो सकते हैं। 9 दिन तक चलने वाले इस संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के अवसर पर इलाके के हजारों श्रद्धालु जुटे हैं। जिससे उत्सवी माहौल देखने को मिल रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सुमन

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