एनएचएम संविदा कर्मियों को नियमित भर्तियों में प्राथमिकता व आयु-छूट की मांग तेज
लखनऊ, 06 जनवरी (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों को विभागीय नियमित रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में अनुभव आधारित वेटेज/वरीयता एवं आयु-सीमा में छूट प्रदान किए जाने की मांग को लेकर शासन स्तर पर अपना पक्ष मजबूती से रखा है।
संघ के अनुसार एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत संविदा कार्मिक प्रदेश की प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विगत कई वर्षों से यही कार्मिक ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य सेवाओं का सतत संचालन सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके बावजूद नियमित भर्तियों में उनके अनुभव एवं सेवा अवधि को समुचित मान्यता न मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री योगेश कुमार ने मंगलवार को बताया कि संघ प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के उपरांत मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश की ओर से 22 अगस्त 2024 को शासन को पत्र प्रेषित कर एनएचएम संविदा कर्मियों को नियमित रिक्त पदों पर नियुक्ति में वेटेज/वरीयता दिए जाने का स्पष्ट प्रस्ताव भेजा गया है। संगठन ने अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को पत्र लिखकर उक्त प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया है।
वर्तमान में प्रदेश में आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक एवं हेल्थ एजुकेशन ऑफिसर (एचईओ) जैसे पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रचलित/प्रस्तावित है जबकि भविष्य में पैरामेडिकल एवं तकनीकी संवर्गों में भी भर्तियों की संभावना है। संगठन का कहना है कि एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत अधिकांश संविदा कार्मिक इन पदों के लिए अहर्ता-पूर्ण, पंजीकृत एवं अनुभवी हैं।
संघ ने यह भी रेखांकित किया कि पूर्व में एक्स-रे टेक्नीशियन एवं नेत्र परीक्षण सहायक (ऑप्टोमेट्रिस्ट) की भर्ती से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि एनएचएम कार्मिकों को वरीयता देने का विषय पहले से ही विधिक एवं नीतिगत विमर्श का हिस्सा रहा है।
प्रदेश महामंत्री योगेश कुमार ने बताया कि संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने मांग की है कि एनएचएम संविदा सेवा को नियमित भर्तियों में अनुभव वेटेज के रूप में मान्यता दी जाए। अहर्ता-पूर्ण संविदा कर्मियों को आयु-सीमा में उपयुक्त छूट प्रदान की जाए। यह व्यवस्था केवल वर्तमान भर्तियों तक सीमित न रहकर भविष्य की सभी स्वास्थ्य संवर्गीय भर्तियों में लागू हो। इसके लिए एक समेकित सामान्य नीति/शासनादेश निर्गत किया जाए। संघ का कहना है कि ऐसा निर्णय न केवल वर्षों से सेवाएं दे रहे अनुभवी मानव संसाधन के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतरता, गुणवत्ता एवं प्रशासनिक स्थिरता भी सुनिश्चित करेगा, जिससे शासन को दीर्घकालीन लाभ प्राप्त होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

