श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर शुरू हुई अत्याधुनिक धातु परीक्षण की नई व्यवस्था, दान में पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा
मथुरा, 30 अक्टूबर (हि.स.)। भगवान श्रीकृष्ण के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक अर्पित की जाने वाली प्रत्येक भेंट का अपना धार्मिक और भावनात्मक महत्व है। श्रद्धातु जिस विश्वास के साथ अपनी सामर्थ्य के अनुसार धातु एवं अन्य सामग्री दान करते हैं, उस विश्वास की मर्यादा बनाए रखना भी मंदिर प्रबंधन का महत्वपूर्ण दायित्व है। इसी भावना को व्यवहार में उतारते हुए शुक्रवार शाम श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान ने दान में प्राप्त होने वाली धातु सामग्री की शुद्धता की वैज्ञानिक जाँच की नई व्यवस्था प्रारंभ की है।
शुक्रवार श्रीकृष्ण-जन्मस्थान परिसर में अत्याधुनिक कम्प्यूटराइज्ड धातु परीक्षण मशीन का शुभारंभ किया गया। ट्रस्टी श्यामसुंदर चौधरी, सचिव कपिल शर्मा एवं गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी की उपस्थिति में प्रारंभ हुई इस व्यवस्था के अंतर्गत अब श्रद्धालुओं द्वारा दान में अर्पित की जाने वाली धातु की मौके पर ही जाँच संभव होगी। परीक्षण के माध्यम से धातु की शुद्धता तथा उसमें सम्मिलित विभिन्न धातुओं की मात्रा का विवरण प्राप्त किया जा सकेगा।
श्रीकृष्ण-जन्पस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि इस नई पहल से दान प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगी।
इस अत्याधुनिक मशीन की विशेषता यह है कि दान में दी गई वस्तु को बिना काटे-तोड़े, उसके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए ही उसकी वैज्ञानिक जाँच की जाएगी। परीक्षण के बाद धातु की शुद्धता और मात्रा का पूरा विवरण एक रिपोर्ट के रूप में तैयार होगा, जिसकी एक प्रति (दानदाता के हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर के साथ) उन्हें सौंपी जाएगी और दूसरी प्रति संस्थान के रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी। यह व्यवस्था केवल काउंटर के दान तक सीमित नहीं है, बल्कि सीसीटीवी निगरानी में हुंडी और दानपेटिकाओं से प्राप्त होने वाली धातुओं का परीक्षण भी दान गणना कक्ष में इसी प्रक्रिया से किया जाएगा। धातु की वास्तविक संरचना और गुणवत्ता का सटीक विवरण होने से संस्थान को भविष्य में इसके सुरक्षित भंडारण और रखरखाव में काफी सहूलियत होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार

