नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की गुणवत्ता मील का पत्थर साबित होगी : राजेंद्र सिंह पवार

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की गुणवत्ता मील का पत्थर साबित होगी : राजेंद्र सिंह पवार


-नई शिक्षा नीति सुनहरे भविष्य की बुनियाद : संजय श्रीवास्तव

-वरिष्ठ शिक्षाविद् संजय श्रीवास्तव नई शिक्षा नीति के राष्ट्रीय सम्मेलन में आमंत्रित

प्रयागराज, 18 जनवरी (हि.स.)। एन.आई.टी. यूनिवर्सिटी, नीमराना, राजस्थान द्वारा आयोजित सी.बी.एस.ई. बोर्ड के कुछ चयनित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए नई शिक्षा नीति पर आधारित परिवर्तनकारी नेतृत्व के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में जनपद प्रयागराज के वरिष्ठ शिक्षाविद एवं राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड से सम्मानित, एम.जी.एम.के.पी.एस. के प्रधानाचार्य संजय श्रीवास्तव को आमंत्रित किया गया था।

संजय श्रीवास्तव ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि 17 जनवरी को इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन एन.आई.टी. यूनिवर्सिटी, नीमराना के संस्थापक पद्म विभूषण राजेंद्र सिंह पवार ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में देश भर से आये हुए प्रधानाचार्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोरोना काल में बाधित एवं दम तोड़ती शिक्षा प्रणाली को एन.ई.पी.के क्रियान्वयन से संजीवनी बूटी मिल गई है और उसमें एक नई जान फूंक दी है। निश्चित ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा की गुणवत्ता एवं इसके स्तर के उन्नयन में मील का पत्थर साबित होगी।

एन.आई.टी. विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. गोपालन ने प्रधानाचार्यों को अपने टीम का कप्तान बताते हुए अपने विद्यालय के शिक्षकों को प्रेरित करने एवं उन्हें विद्यालय के प्रति पूरे समर्पण के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड से सम्मानित संजय श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय सम्मेलन की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आधुनिक शिक्षा को विस्तार देने हेतु एक सुनहरे भविष्य की बुनियाद का दस्तावेज है। जिसके ईमानदारी पूर्वक क्रियान्वयन से शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति आ जाएगी। उन्होंने बोर्ड परीक्षा के समय विद्यार्थियों में होने वाले तनाव को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय बताए।

इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के सह-संस्थापक विजय के. थांडानी, उपाध्यक्ष प्रो. परिमल मांडके, डी.पी.एस.सोसाइटी की कार्यकारी निदेशक डॉ.संध्या अवस्थी, प्रो. बालकृष्णन राव, प्रो. देबाशीष, डॉ. उत्कर्ष एवं डॉ. शिवेंद्र आदि ने भी सम्बोधित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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