नई दिल्ली के उत्तर प्रदेश सदन ‘त्रिवेणी’ में कथित भ्रष्टाचार का मामला, कर्मचारियों ने सीएम योगी से की निष्पक्ष जांच की मांग
नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित उत्तर प्रदेश सदन ‘त्रिवेणी’ में तैनात कर्मचारियों और वाहन चालकों ने मुख्य व्यवस्थाधिकारी राजीव तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर मानसिक प्रताड़ना, उत्पीड़न और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत की है। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका कहना है कि कई बार आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कार्यस्थल पर ऐसा माहौल बना दिया गया है, जिससे कर्मचारी मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं।
बिना एंट्री कमरे देने और पैसे वसूली का आरोप
शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सदन के कमरों को नियमों के विपरीत बिना आधिकारिक एंट्री के निजी लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बदले अवैध रूप से पैसे वसूले जाने का भी आरोप कर्मचारियों ने लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में नियमों की अनदेखी कर आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है।
फर्जी बिलों से भुगतान कराने का भी आरोप
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि जैम पोर्टल के माध्यम से फर्जी बिल लगाकर भुगतान कराया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग
कर्मचारियों और वाहन चालकों ने मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो कर्मचारियों का उत्पीड़न लगातार बढ़ता जाएगा। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि नई दिल्ली स्थित उत्तर प्रदेश सदन ‘त्रिवेणी’ प्रदेश सरकार का एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान माना जाता है। दिल्ली प्रवास के दौरान यहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों सहित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ठहरते हैं। ऐसे में कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को काफी गंभीर माना जा रहा है।


