कुशीनगर के तमकुहीराज में 31 अक्टूबर से राष्ट्रीय रॉकेट्री कप, 76 टीमें लेंगी हिस्सा : शंशाक
-तमकुहीराज में 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक होगा ‘IN-SPACe नारायणी रॉकेट्री कप-2026’ का आयोजन
- देशभर की 76 छात्र टीमें लेंगी हिस्सा, नारायणी नदी के तट पर अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक का दिखेगा रोमांच
- ‘अमृत प्रयास’ के माध्यम से देवरिया लोकसभा में विकसित हो रही है अंतरिक्ष जागरूकता और वैज्ञानिक सोच की संस्कृति : सांसद शशांक मणि
कुशीनगर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तमकुहीराज में 31 अक्टूबर से तीन नवंबर तक राष्ट्रीय स्तर की ‘IN-SPACe नारायणी रॉकेट्री कप-2026’ प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। नारायणी नदी के तट पर होने वाले इस आयोजन में देशभर के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों की 76 छात्र टीमें हिस्सा लेंगी। उक्त बातें देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने पत्रकारों से प्रेस वार्ता में कहीं।उन्होंने कहा कि आयोजन को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बात हैं। इससे युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान, आधुनिक तकनीक और नवाचार को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को रॉकेट निर्माण, डिजाइन, प्रक्षेपण और अंतरिक्ष तकनीक का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की ओर से श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (SSDF), उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इसमें 48 टीमें कैनसेट और 28 टीमें मॉडल रॉकेट्री श्रेणी में भाग लेंगी। आयोजन में करीब 608 छात्र और 150 शिक्षक व मेंटर शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ने से गांवों के विकास और किसानों को खेती में आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए भी प्रेरणा मिल सकती है।ग्राम प्रधानों और स्थानीय युवाओं को भी तकनीकी विकास की संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
सांसद ने कहा कि यह आयोजन उनकी दस वर्षीय विकास रणनीति ‘अमृत प्रयास’ के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसके तहत शिक्षा, तकनीक, उद्यमिता और जनभागीदारी के माध्यम से विकसित देवरिया लोकसभा क्षेत्र की परिकल्पना को साकार करने का लक्ष्य है।
प्रतियोगिता में छात्र टीमें मॉडल रॉकेट तैयार करने, पेलोड को निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचाने और उसे सुरक्षित वापस लाने जैसी तकनीकी चुनौतियों पर काम करेंगी। कैनसेट छोटे उपग्रह जैसा उपकरण होता है, जिसमें विभिन्न तकनीकी उपकरण लगाए जाते हैं। इससे विद्यार्थियों को पेलोड डिजाइन, मिशन प्रबंधन, समस्या समाधान और टीमवर्क का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
एन - एस पी ए सी ई ( IN-SPACe ) के प्रमोशन निदेशालय के निदेशक एवं एएसआई के कार्यकारी सचिव डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि प्रतियोगिता विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से अंतरिक्ष तकनीक से जोड़ने की पहल है। इससे भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों को तैयार करने में मदद मिलेगी।
प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने कहा कि प्रतियोगिता से विद्यार्थियों में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप के प्रति रुचि बढ़ेगी। यह आयोजन अंतरिक्ष शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ आत्मनिर्भर भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

