नेशनल पोस्टल वर्कर्स डे पर डाककर्मियों को विश्वभर में किया जाता है सम्मानित: कृष्ण कुमार यादव
-भारतीय डाक सरकारी योजनाओं व जनकल्याणकारी सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने में अहम भूमिका: कृष्ण कुमार यादव
प्रयागराज, 30 जून (हि.स)। आज भारतीय डाक केवल संदेश पहुँचाने का माध्यम नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक तक भरोसा, सुविधा और शासकीय सेवाओं को पहुँचाने वाला एक सशक्त तंत्र बन चुका है। विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं जनकल्याणकारी सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने में भी डाक कर्मी सरकार और जनता के बीच एक सशक्त एवं विश्वसनीय सेतु के रूप में उभरकर सामने आए हैं। डाक कर्मी लंबे समय से समाज की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं और हर वर्ष 1 जुलाई को मनाया जाने वाला “नेशनल पोस्टल वर्कर्स डे” उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।
यह जानकारी उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने मंगलवार को देते हुए बताया कि ‘नेशनल पोस्टल वर्कर डे’ की अवधारणा अमेरिका से आई, जहां वाशिंगटन राज्य के सीऐटल शहर में वर्ष 1997 में कर्मचारियों के सम्मान में इस विशेष दिवस की शुरुआत की गई। धीरे-धीरे इसे भारत सहित अन्य देशों में भी मनाया जाने लगा। यह दिन दुनिया भर में डाककर्मियों द्वारा की जाने वाली सेवा के सम्मान में मनाया जाता है, जो हमारे समुदायों को आपस में जोड़े रखते हैं।
पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि संचार के क्षेत्र में डिजिटलीकरण ने भले ही व्यापक परिवर्तन ला दिया हो, लेकिन डाककर्मी आज भी वितरण व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं। प्रतिकूल मौसम और विषम परिस्थितियों के बावजूद डाक कर्मी प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर पत्र, स्पीड पोस्ट, पार्सल, ई-कॉमर्स उत्पाद, मेडिकल सप्लाई की समयबद्ध डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं। भारत में आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक चेक बुक, एटीएम कार्ड, पीएम विश्वकर्मा टूल किट्स, परीक्षा सामग्री, विभिन्न मंदिरों के प्रसाद, गंगाजल सहित अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं आवश्यक सामग्री का वितरण पोस्टमैन के माध्यम से किया जाता है। “डाक सेवा, जन सेवा” के संकल्प के साथ भारतीय डाक गाँव-गाँव और शहर-शहर तक सेवाएं पहुंचाकर लोगों के जीवन को आसान बना रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-2025 में पूरे भारत में 3.92 अरब से ज्यादा डाक का परियात (ट्रैफिक) दर्ज किया गया।
भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि पोस्टमैन भारतीय डाक विभाग का सबसे जाना-पहचाना चेहरा है। ‘डाकिया डाक लाया’ के साथ-साथ, अब ‘डाकिया बैंक लाया’ भी उतना ही लोकप्रिय हो गया है। आज पोस्टमैन अपने डाक बैग में पत्रों के साथ-साथ स्मार्टफोन आधारित डिजिटल डिवाइस भी लेकर चलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक एवं सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पोस्टमैन और ग्रामीण डाक सेवक मोबाइल एटीएम के रूप में कार्य करते हुए डीबीटी, ई-केवाईसी, जन सुरक्षा योजनाओं, आधार सेवाओं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ई-श्रम कार्ड, वाहन बीमा तथा डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जैसी अनेक सेवाएं लोगों के द्वार तक पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण, जनजातीय, पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों, जहाँ डिजिटल या निजी कूरियर सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ आज भी पोस्टमैन लोगों के लिए सबसे विश्वसनीय संपर्क सूत्र और आवश्यक सेवाओं का प्रमुख माध्यम बने हुए हैं। भारतीय डाक विश्वास, संवाद और सुविधा को हर घर तक पहुंचाते हुए लगातार राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

