राष्ट्रीय लोक अदालत में निर्णय थोपा नहीं जाता, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवादों का होता है समाधान : एडीजे सपना त्रिपाठी

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राष्ट्रीय लोक अदालत में निर्णय थोपा नहीं जाता, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवादों का होता है समाधान : एडीजे सपना त्रिपाठी


कानपुर, 06 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों का आपसी सहमति से त्वरित निस्तारण किया जाएगा, जिससे पक्षकारों को शीघ्र और सुलभ न्याय मिल सकेगा। इस मंच पर किसी प्रकार का निर्णय थोपा नहीं जाता, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवादों का समाधान कराया जाता है। अधिक से अधिक लोगों को इसमें भाग लेकर अपने मामलों का निपटारा करना चाहिए, ताकि समय, धन और संसाधनों की बचत हो सके। लोक अदालत एक प्रभावी व्यवस्था है, जहां विभिन्न प्रकार के दीवानी, पारिवारिक और अन्य मामलों का समाधान संभव है। यह बातें बुधवार को अपर जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सपना त्रिपाठी ने कहीं।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार नौ मई, शनिवार को जनपद सहित देशभर के न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बैंक वसूली, किरायेदारी, मोबाइल फोन व केबल नेटवर्क से जुड़े प्रकरण, आयकर, बैंक एवं अन्य वित्तीय लेनदेन, दीवानी वाद, उत्तराधिकार, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, चेक बाउंस, राजस्व एवं चकबंदी से संबंधित मामलों का निस्तारण किया जाएगा।

लोक अदालत को सफल बनाने के लिए न्यायालय प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पूर्व में रैली आयोजित कर लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया। इसी कड़ी में आज न्यायाधीशों ने प्रेसवार्ता कर मीडिया के माध्यम से आमजन से अपील करी कि वादी एवं प्रतिवादी अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपने मामलों का निपटारा कराएं।

अपर प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश राजीव महेश्वरम ने बताया कि लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों के बीच आपसी सुलह कराना है। इसमें किसी प्रकार का निर्णय थोपने की प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों को समझौते के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। विशेष रूप से पारिवारिक विवाद, जैसे तलाक, भरण-पोषण, बच्चों के संरक्षण एवं पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों में यह व्यवस्था बेहद उपयोगी है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) सुचि श्रीवास्तव ने कहा कि लोक अदालत को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां किसी भी प्रकार का दंडात्मक निर्णय नहीं दिया जाता, बल्कि आपसी सहमति के आधार पर ही मामलों का निस्तारण होता है।

उन्होंने आमजन से अपील की कि वे नौ मई को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचकर इस व्यवस्था का लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कराएं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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