राष्ट्रीय डाक सप्ताह : डाक टिकटों में भारतीय परंपरा और संस्कृति से रूबरू हुए विद्यार्थी

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राष्ट्रीय डाक सप्ताह : डाक टिकटों में भारतीय परंपरा और संस्कृति से रूबरू हुए विद्यार्थी


राष्ट्रीय डाक सप्ताह : डाक टिकटों में भारतीय परंपरा और संस्कृति से रूबरू हुए विद्यार्थी


देवरिया, 12 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अंतर्गत सोमवार को डाक विभाग, देवरिया मंडल की ओर से देवरिया के प्रधान डाकघर परिसर में ‘फन विथ फिलेटली’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, देवरिया के विद्यार्थियों ने डाक टिकटों की प्रदर्शनी देखी और फिलेटली यानी डाक टिकट संग्रह की बारीकियों को जाना। प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास, संस्कृति, परंपरा और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में डाक टिकट संग्रह के प्रति रुचि विकसित करना और उन्हें ज्ञानवर्धक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना था।

प्रदर्शनी रोटरी क्लब, देवरिया के सचिव एवं राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता डाक टिकट संग्राहक हिमांशु कुमार ने लगाई। इसमें पुराने डाक टिकट, दुनिया के पहले डाक टिकट ‘पेनी ब्लैक’ की प्रतिकृति, पुराने पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र, प्रथम दिवस आवरण और मिनिएचर शीट प्रदर्शित की गईं। विभिन्न देशों की ओर से भगवान श्रीराम पर जारी डाक टिकट भी आकर्षण का केंद्र रहे।

विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम, महात्मा गांधी के जीवन और उनके योगदान पर आधारित डाक टिकटों को भी देखा। आजाद भारत के पहले चार डाक टिकटों का सेट, खादी पर जारी विश्व का पहला डाक टिकट, ताम्रपत्र, रेशम और लकड़ी से बने पोस्टकार्ड तथा हस्तनिर्मित लिफाफे प्रदर्शनी की खास उपलब्धियां रहीं। सूखी पत्तियों से बने लिफाफों ने भी विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। दांडी यात्रा और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों पर जारी विशेष आवरण के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराया गया।

हिमांशु कुमार ने विद्यार्थियों को फिलेटली के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि डाक टिकट किसी भी देश का नन्हा राजदूत होता है। इसके माध्यम से देश की संस्कृति, परंपरा, इतिहास और विकास की झलक मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को डाक टिकट संग्रह को ज्ञानवर्धक शौक के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।

अधीक्षक डाकघर, देवरिया मंडल विवेकानंद सिंह ने कहा कि मोबाइल और डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच बच्चों को रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों के लिए भी समय निकालना चाहिए। पत्र लेखन और डाक टिकट संग्रह जैसे शौक विद्यार्थियों के ज्ञान, कल्पनाशीलता और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने डाक विभाग की ओर से दूर-दराज के क्षेत्रों तक सस्ती और त्वरित डाक सेवाएं उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी।

राजकुमार ने कहा कि इस तरह की प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को इतिहास और संस्कृति को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करती हैं। वहीं, डाक विभाग के शिवरतन चौरसिया ने राष्ट्रीय स्तर की ‘ढाई आखर’ पत्र लेखन प्रतियोगिता के विषय ‘मेरी धरती मां की रक्षा का मेरा वादा’ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को दीनदयाल स्पर्श योजना के उद्देश्य और महत्व से भी अवगत कराया। कार्यक्रम में परिवाद निरीक्षक राजन गुप्ता, शिवानंद कुशवाहा, सौरभ सिंह, अमित कुमार और नंदन कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

Livevns.news Desk
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