विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम : प्रो. सुषमा पाण्डेय

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विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा नारी शक्ति वंदन अधिनियम : प्रो. सुषमा पाण्डेय


गोरखपुर, 15 अप्रैल (हि.स.)। भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व का अध्याय तब जुड़ा, जब संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित किया। यह अधिनियम केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी—महिलाओं—को अधिकार, सम्मान और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक पहल के पीछे केंद्र सरकार की स्पष्ट सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता झलकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी के नेतृत्व में सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मूल मंत्र को साकार करते हुए महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। लंबे समय से लंबित इस मांग के पूरा होने से देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे नीति निर्माण में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा सकेंगी। यह कदम न केवल लैंगिक समानता की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और संतुलित बनाने वाला भी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह अधिनियम ग्रामीण और शहरी—दोनों ही क्षेत्रों की महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। अब महिलाएं केवल परिवार और समाज तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि देश की शासन व्यवस्था और राजनीति में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इससे उनके आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता को नई पहचान मिलेगी।

इस कानून का प्रभाव केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक सोच में भी व्यापक परिवर्तन लाएगा। जब महिलाएं नेतृत्वकारी भूमिकाओं में आगे बढ़ेंगी, तो समाज में बालिकाओं के प्रति दृष्टिकोण भी सकारात्मक रूप से बदलेगा। इससे आने वाली पीढ़ियों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिलेगी और एक सशक्त सामाजिक ढांचे का निर्माण होगा।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के स्वावलंबन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिक संवेदनशील और प्रभावी नीतियां बन सकेंगी। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेगी और विकास को संतुलित बनाएगी।

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सुषमा पाण्डेय ने बुधवार काे बताया कि दूरदर्शी दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह अधिनियम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह न केवल वर्तमान में महिलाओं को सशक्त बना रहा है, बल्कि भविष्य के लिए एक ऐसे समतामूलक, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील समाज की नींव रख रहा है, जहां महिलाएं केवल विकास की सहभागी ही नहीं, बल्कि उसकी नेतृत्वकर्ता भी होंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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