गोरखपुर में “वोटर ड्रॉप” सूची का प्रकाशन, 6.45 लाख से अधिक नाम हटे

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गोरखपुर में “वोटर ड्रॉप” सूची का प्रकाशन, 6.45 लाख से अधिक नाम हटे


गोरखपुर, 06 जनवरी (हि.स.)। जनपद गोरखपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के अंतर्गत “वोटर ड्रॉप” (नाम विलोपन) से संबंधित अद्यतन आंकड़ों का आज औपचारिक रूप से प्रकाशन कर दिया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में मीडिया को पूरी प्रक्रिया, आंकड़ों और आगे की कार्यवाही के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में जनपद भर में घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन कराया गया। इस दौरान मृत मतदाता, स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके मतदाता, दोहरे पंजीकरण (डुप्लीकेट वोटर) तथा अपात्र पाए गए मतदाताओं के नाम नियमानुसार मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसी प्रक्रिया को वोटर ड्रॉप कहा जाता है। डीएम के अनुसार गोरखपुर जनपद में अब तक कुल 6,45,625 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 9 प्रतिशत है।

डीएम ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और विधि सम्मत रही है। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया, इसके बाद निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) स्तर पर सभी रिपोर्टों की जांच की गई। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम जानबूझकर नहीं हटाया गया है और सभी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि जिन मतदाताओं के नाम वोटर ड्रॉप सूची में शामिल किए गए हैं, उनके पते पर बीएलओ द्वारा नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस मिलने के बाद यदि किसी मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो वह निर्वाचन आयोग द्वारा जारी 13 प्रपत्रों में से किसी एक उपयुक्त प्रपत्र को भरकर, अपना नाम पुनः मतदाता सूची में जुड़वा सकता है।

डीएम दीपक मीणा ने बताया कि इन प्रपत्रों के साथ अपने वर्तमान निवास स्थान का वैध साक्ष्य देना अनिवार्य होगा। निवास प्रमाण के रूप में निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य दस्तावेज—जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली या पानी का बिल, बैंक पासबुक, किरायानामा अथवा अन्य अधिकृत दस्तावेज—संलग्न करने होंगे। बिना दस्तावेजी साक्ष्य के कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मतदाता यह प्रक्रिया अपने क्षेत्र के बीएलओ, तहसील कार्यालय या निर्वाचन कार्यालय में ऑफलाइन पूरी कर सकते हैं, वहीं ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। 6 फरवरी तक दावा-आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। इसके बाद प्राप्त आवेदनों की जांच कर नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्रेस वार्ता में डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मकान नंबर में बाहरी व्यक्तियों के नाम गलत तरीके से दर्ज हो गए हैं, तो संबंधित मकान स्वामी या निवासी आपत्ति दर्ज कराकर उन नामों को उस मकान नंबर से हटवा सकता है। जांच के बाद गलत प्रविष्टियों को हटाने की कार्यवाही की जाएगी।

इसके साथ ही डीएम ने बताया कि यदि किसी मृत व्यक्ति का नाम गलती से मतदाता सूची में बना हुआ है, तो उसके संबंध में भी आवेदन देकर नाम हटवाया जा सकता है। सत्यापन के बाद मृतक का नाम मतदाता सूची से विलोपित कर दिया जाएगा, ताकि सूची पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनी रहे।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से कहा कि एक मतदाता केवल एक ही स्थान का मतदाता हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाया जाता है, तो नियमानुसार उसका नाम अतिरिक्त स्थानों से हटाया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय पूरी सावधानी बरतें और सही जानकारी व दस्तावेज ही प्रस्तुत करें।

डीएम दीपक मीणा ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। इससे फर्जी मतदान और गलत प्रविष्टियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा और आगामी चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से संपन्न कराए जा सकेंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपनी मतदाता प्रविष्टि अवश्य जांचें और किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर समय रहते सुधार के लिए आवेदन करें।

प्रेस वार्ता के दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीत कुमार सिंह उप जिला निर्वाचन अधिकारी शंकर मिश्रा सहित निर्वाचन कार्यालय के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए वोटर ड्रॉप प्रक्रिया, आंकड़ों और आगे की कार्यवाही से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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