कानपुर की औद्योगिक विरासत को पुनर्जीवित करने पर आईआईटी निदेशक से सांसद की चर्चा

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कानपुर की औद्योगिक विरासत को पुनर्जीवित करने पर आईआईटी निदेशक से सांसद की चर्चा


कानपुर की औद्योगिक विरासत को पुनर्जीवित करने पर आईआईटी निदेशक से सांसद की चर्चा


कानपुर, 01 सितंबर (हि.स.)। कानपुर की बंद और कम उपयोग में आ रही औद्योगिक परिसंपत्तियों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और कौशल विकास से जोड़कर रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। हमारा लक्ष्य औद्योगिक विरासत को केवल याद करना नहीं, बल्कि उसके आधार पर कानपुर के लिए आधुनिक और रोजगारपरक औद्योगिक भविष्य तैयार करना है। यह बातें मंगलवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के निदेशक से मुलाकात के दौरान सांसद रमेश अवस्थी ने कहीं।

सांसद रमेश अवस्थी ने आईआईटी कानपुर के निदेशक से भेंट कर शहर की औद्योगिक एवं टेक्सटाइल विरासत को पुनर्जीवित करने पर चर्चा की। एनटीसी और बीआईसी की औद्योगिक इकाइयों, उनकी भूमि व अन्य परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और नए औद्योगिक अवसर विकसित करने पर विचार-विमर्श हुआ।

सांसद ने कहा कि कानपुर की मिलों ने दशकों तक हजारों परिवारों को रोजगार दिया। समय के साथ कई इकाइयां बंद या सीमित गतिविधियों तक सिमट गईं। ऐसे में उपलब्ध भूमि और परिसंपत्तियों को भविष्य की औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने आईआईटी कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से औद्योगिक परिसंपत्तियों का प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन कराने और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने पर चर्चा की। इसमें संभावित औद्योगिक उपयोग, रोजगार और निवेश की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।

टेक्सटाइल, तकनीकी टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप हब, कौशल विकास केंद्र, आरएंडडी सेंटर और एमएसएमई क्लस्टर जैसे क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। सांसद ने कहा कि आईआईटी कानपुर, सरकार, एनटीसी, बीआईसी, उद्योग जगत और स्थानीय उद्यमियों को साथ लेकर समन्वित मॉडल विकसित किया जाना चाहिए।------------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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