वक्फ घोटाले की जांच व विशेष ऑडिट की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मिले मोहसिन रज़ा
लखनऊ, 12 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुख्यमंत्री आवास पर बुधवार को पूर्व मंत्री मोहसिन रज़ा ने भेंट कर वक्फ बोर्डों में व्याप्त बड़े पैमाने के घोटालों और अनियमितताओं पर संज्ञान लिए जाने की बात की है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केवल 1,27,000 रजिस्टर्ड वक्फ रह गए हैं, जबकि पहले यह संख्या दो लाख से अधिक थी। उन्होंने कहा कि पुराने दौर में (समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), कांग्रेस शासनकाल) वक्फ बोर्ड का समुचित ऑडिट नहीं कराया गया और लाखों संपत्तियों का लेखा-जोखा अस्पष्ट रहा।
मोहसिन रज़ा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पारित वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानून वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने, उनकी सुरक्षा और सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि वक्फ संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए त्वरित और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
श्री रज़ा ने शिया एवं सुन्नी दोनों वक्फ बोर्डों की समस्त वक्फ संपत्तियों का जनपदवार स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठन करके सत्यापन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनपदवार विशेष ऑडिट, भौतिक निरीक्षण और अभिलेखों का मिलान कराकर रजिस्ट्री तथा वास्तविक संपत्तियों की पूर्ण सूची तैयार कराई जाए। जिन संपत्तियों में हेरफेर, फर्जी नामांतरण, अवैध लीज़, या कब्जा परिवरतन पाया जाए, उनके विरुद्ध तीव्र और कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा संपत्तियों की वसूली व पुनर्स्थापना सुनिश्चित की जाए। वक़्फ़ बाय यूज़र के विवादों का भी निस्तारण किया जाए। दोषी व्यक्तियों, संस्थानों, मुतवल्लियों, प्रभावशाली धर्मगुरुओं अथवा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त समूहों के तत्त्वों की पारदर्शी जांच कर सार्वजनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
वक्फ संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कर उनके विकास के लिए प्रामाणिक नीतियां अपनाई जाएं ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के वास्तविक जरूरतमंदों, पिछड़ों और दबे-कुचले लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके। प्रदेश स्तर पर जनपदवार समितियां गठित कर व्यापक निगरानी, ऑडिट और वसूली अभियान चलाया जाए ताकि पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता का विश्वास पुनः स्थापित हो।
श्री रज़ा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि आपकी भ्रष्टाचार-विरोधी और जीरो-टॉलरेंस नीति के अनुरूप इस मामले में उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और शीघ्र कार्रवाई की जाए। उन्होंने उल्लेख किया कि विषय की संवेदनशीलता और जनहित को देखते हुए तत्काल एसआईटी जांच व विशेष ऑडिट आरम्भ कराकर जनहित में निर्णय लिया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय

