यूक्रेन ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले सागर गुप्ता का अंतिम संस्कार, परिजनों ने सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप

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यूक्रेन ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले सागर गुप्ता का अंतिम संस्कार, परिजनों ने सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप


कानपुर, 06 अगस्त (हि.स.)। यूक्रेन के ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले कानपुर निवासी मर्चेंट नेवी के चीफ अफसर सागर गुप्ता का गुरुवार को भैरव घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। बड़े भाई मनीष गुप्ता ने उन्हें मुखाग्नि दी। परिजन, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान परिवार ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए शहीद का दर्जा, दो करोड़ रुपये का मुआवजा और पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई।

बुधवार शाम करीब चार बजे सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर उनके शास्त्री नगर स्थित आवास पहुंचा था। ताबूत खुलते ही पत्नी शालू गुप्ता, मां रामादेवी और अन्य परिजन बिलख पड़े। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। गुरुवार काे अंतिम यात्रा शास्त्री नगर से भैरव घाट के लिए निकली। रास्ते में लोगों ने नम आंखों से सागर को श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना था कि पार्थिव शरीर 18 दिन पुराना होने के कारण अधिक देर तक घर पर रखना संभव नहीं था, इसलिए अंतिम संस्कार करना पड़ा।

बड़े भाई मनीष गुप्ता ने कहा कि परिवार ने पार्थिव शरीर पर राष्ट्रीय ध्वज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, लेकिन समय पर व्यवस्था नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने स्वयं तिरंगा खरीदकर सागर के पार्थिव शरीर पर ओढ़ाया। परिवार का यह भी आरोप है कि अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में शासन-प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी या जनप्रतिनिधि मौजूद नहीं रहा, हालांकि समाजवादी पार्टी के कुछ नेता वहां पहुंचे।

परिजनों ने सदर तहसील में तहसीलदार विनय कुमार द्विवेदी को ज्ञापन सौंपकर सागर को शहीद का दर्जा देने, दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की थी। तहसीलदार ने मांगपत्र शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

सागर गुप्ता कानपुर के शास्त्री नगर निवासी थे और वर्ष 2018 से मर्चेंट नेवी में सेवाएं दे रहे थे। परिजनों के अनुसार, 18 जुलाई को जिस जहाज पर वह तैनात थे, उस पर यूक्रेन की ओर से दो बार ड्रोन हमला हुआ। पहले हमले के बाद उन्होंने जहाज पर मौजूद आठ क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जहाज को सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने का प्रयास करते समय दूसरा हमला हुआ, जिसमें उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना परिवार को 21 जुलाई को मिली थी। लगभग 18 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर भारत लाया गया, जिसके बाद कानपुर में गुरुवार काे अंतिम संस्कार किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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