यूपी में मातृ मृत्यु दर बढ़ी, प्रसव केंद्रों को प्रभावी बनाने पर जोर

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यूपी में मातृ मृत्यु दर बढ़ी, प्रसव केंद्रों को प्रभावी बनाने पर जोर


लखनऊ, 08 जून (हि.स.)। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में सोमवार को नवीं पार्टनरशिप कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं, तकनीकी विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रदेश में मातृ मृत्यु दर बढ़ने पर चिंता जाहिर की।

बैठक को संबोधित करते हुए अमित कुमार घोष ने कहा कि हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश की मातृ मृत्यु दर 141 से बढ़कर 154 हो गया है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए त्वरित एवं प्रभावी हस्तक्षेपों को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। जरूरत है कि प्रभावी मॉनिटरिंग एवं अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि मातृ एवं नवजात मृत्यु के लगभग 40 प्रतिशत मामले प्रसव के दिन तथा प्रसव के प्रथम सप्ताह में होते हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण इंट्रापार्टम केयर (प्रसवकालीन देखभाल) को सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए स्टाफ नर्सों की क्षमता वृद्धि, जटिलताओं के प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण तथा नर्स मेंटरिंग कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव ने लेबर रूम प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सभी क्लिनिकल स्टाफ को मातृ एवं नवजात जटिलताओं के प्रबंधन में प्रशिक्षित करने पर बल दिया। उन्होंने जिला स्तर पर हब एवं स्पोक मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाने, चयनित उच्च प्रसव केंद्रों, सी-इमॉनक (CeMONC) एवं बी-इमॉनक (BeMONC) संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के विस्तार तथा नियमित निगरानी पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु की रिपोर्टिंग एवं गोपनीय मृत्यु समीक्षा (Confidential Death Review) प्रणाली को मजबूत किया जाना आवश्यक है। इसके लिए रिपोर्ट किए गए मामलों की स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा गहन समीक्षा कराई जाएगी ताकि मृत्यु के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं के लिए सुनिश्चित रेफरल प्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर समय से पहचान, नामित स्वास्थ्य संस्थान तथा पूर्णतः सुसज्जित एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चिन्हित सी-इमॉनक एवं बी-इमॉनक केंद्रों पर आवश्यक विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी तथा उनके प्रशिक्षण, गुणवत्ता निगरानी एवं मेंटरिंग की व्यवस्था की जाएगी।

इस अवसर पर सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पिंकी जोवेल, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. सारिका मोहन, वीसी केजीएमयू प्राे. सोनिया नित्यानंद, गेट्स फाउंडेशन से डॉ. देवेंद्र खंडाइत, डॉ. गुंजन तनेजा, यूपीटीएसयू से जॉन एंथोनी, स्वास्थ्य विभाग के सलाहकार डॉ. हिमांशु भूषण, संतोष मैथ्यू उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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