मैटेरियल साइंस एवं मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग छात्रों के लिए बन रहा नई संभावनाओं का केंद्र

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मैटेरियल साइंस एवं मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग छात्रों के लिए बन रहा नई संभावनाओं का केंद्र


कानपुर, 13 जून (हि.स.)। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) का मैटेरियल साइंस एवं मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग शिक्षा, शोध और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। वर्ष 2004 में स्थापित यह विभाग पारंपरिक धातु विज्ञान से आगे बढ़ते हुए अंतरिक्ष तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा और ग्रीन एनर्जी जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञ तैयार कर रहा है। हाल ही में आयोजित मैटेरियल कैंप और विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ हुए समझौतों के बाद छात्रों के बीच इस पाठ्यक्रम की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

विभाग द्वारा आईआईटी हैदराबाद समेत विभिन्न संस्थानों के साथ किए गए शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों को संयुक्त शोध, नवाचार और औद्योगिक परियोजनाओं पर कार्य करने का अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस मैनेजमेंट, लीडरशिप डेवलपमेंट और स्टार्टअप पिचिंग जैसी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। चयनित छात्र टीमों को इनक्यूबेशन सहायता और पुरस्कार प्राप्त करने के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

औद्योगिक नगरी कानपुर में स्थित होने के कारण विभाग को उद्योगों से सीधे जुड़ने का लाभ मिलता है। विभाग में मैटेरियल कैरेक्टराइजेशन लैब, मेटालोग्राफी लैब, कोरोजन लैब, पाउडर मेटलर्जी लैब और फर्नेस लैब जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से छात्रों को प्रयोगात्मक ज्ञान और शोध कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है।

विभाग से अध्ययन पूरा करने वाले छात्र स्टील उद्योग, माइनिंग सेक्टर, रेलवे, डीआरडीओ, सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं तथा विभिन्न आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मैटेरियल साइंस आधुनिक तकनीकी विकास की आधारशिला है और इस क्षेत्र में कुशल पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है।

विभाग में बीटेक, एमटेक और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। बीटेक में प्रवेश जेईई (मेन) अथवा इंटरमीडिएट मेरिट के आधार पर दिया जाता है, जबकि नैनोसाइंस एवं नैनोटेक्नोलॉजी में एमटेक के लिए प्रत्यक्ष प्रवेश की व्यवस्था है। मेटलर्जिकल एवं मैटेरियल इंजीनियरिंग डिप्लोमा पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को लेटरल एंट्री के माध्यम से बीटेक द्वितीय वर्ष में प्रवेश का अवसर भी मिलता है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि मैटेरियल साइंस एवं मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग भविष्य की तकनीकों की आधारशिला है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शोध, नवाचार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि उद्योगों और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ बढ़ता सहयोग विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है तथा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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