संविधान की शपथ के साथ 134 जोड़ों का हुआ सामूहिक विवाह
कानपुर, 30 अप्रैल (हि.स.)। हमारा उद्देश्य समाज में समानता, सम्मान और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना है, इसलिए सामूहिक विवाह में भारतीय संविधान की शपथ के साथ एक नई परंपरा की शुरुआत की गई। यह आयोजन केवल विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में समरसता और जागरूकता का संदेश देने का एक प्रयास भी है। यह बातें गुरुवार को भारतीय दलित पैंथर के अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने कहीं।
समाज कल्याण सेवा समिति द्वारा मोतीझील लॉन में एक भव्य सर्व जातीय सामूहिक वैवाहिक समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें कुल एक सौ चौंतीस जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि सभी जोड़ों ने विवाह के साथ-साथ भारतीय संविधान की शपथ भी ली, जिसे एक नई सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह में दस से पंद्रह हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति रही और पूरा वातावरण मेले जैसा नजर आया। मोतीझील परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया था और चारों ओर उत्सव का माहौल दिखाई दे रहा था। वर-वधू पारंपरिक परिधानों में सजे हुए थे और मंच पर बैठकर वैवाहिक रस्मों को निभा रहे थे।
वैवाहिक कार्यक्रम का शुभारंभ भीकू दीप रत्न बुद्ध विहार जूही द्वारा किया गया। इस दौरान शहर के कई उद्योगपति, समाजसेवी और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में बौद्ध विधि से विवाह संस्कार कराए गए, जिसमें त्रिशरण और पंचशील का पाठ कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान वर-वधू को एक-दूसरे का सम्मान करने, दहेज प्रथा से दूर रहने और सामाजिक समरसता बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। जैसे ही जोड़ों ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई, पूरा परिसर तालियों और नारों से गूंज उठा।
समारोह में आए लोगों के लिए भोजन और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई थीं, जिसमें लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उपस्थित जनसमूह ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में समाज कल्याण सेवा समिति के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजन को सफल बनाने में कई स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हाजी सफीक सिद्दीकी, अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष भारतीय दलित पैंथर ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में एकता, भाईचारे और आपसी सम्मान को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि बिना भेदभाव सभी वर्गों के लोगों का एक मंच पर आकर विवाह करना सामाजिक समरसता का बड़ा उदाहरण है और इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है।
हरिओम खन्ना, जिला अध्यक्ष भारतीय दलित पैंथर ने कहा कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से अनावश्यक खर्चों पर रोक लगती है और समाज में सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा मिलता है।
मुन्ना हजारिया, समाजसेवी ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर एक साथ एक सौ से अधिक जोड़ों का विवाह कराना अपने आप में बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह पहल समाज के हर वर्ग को जोड़ने का काम कर रही है और इससे सामाजिक एकजुटता को बल मिलता है।
बौद्धाचार्य रमेश चंद्र गौतम ने कहा कि बौद्ध विधि से विवाह कराने का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से शांति, समानता और सद्भाव का संदेश भी दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में इस प्रकार के संदेशों की समाज को सबसे ज्यादा आवश्यकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

