महर्षि दधीचि की तपोभूमि को संवारने के लिए 74 लाख रुपये की प्रथम किस्त जारी : जयवीर सिंह

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महर्षि दधीचि की तपोभूमि को संवारने के लिए 74 लाख रुपये की प्रथम किस्त जारी : जयवीर सिंह


लखनऊ/सीतापुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। महर्षि दधीचि की नगरी और नैमिषारण्य की पावन भूमि के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र को अब बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में नैमिषारण्य को आध्यात्मिक-पर्यटन हब बनाने की दिशा में 'वेदारण्यम' समेत कई परियोजनाएं पहले से चल रही हैं। इसी कड़ी में मिश्रिख स्थित महर्षि दधीचि तीर्थ के विकास को हरी झंडी मिल गई है। राज्य सरकार ने करीब 99.14 लाख रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है, जिसमें से 74 लाख रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सीतापुर जनपद का मिश्रिख, महर्षि दधीचि से जुड़ा अत्यंत पावन स्थल है, जिसे प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल महर्षि दधीचि तीर्थ को न सिर्फ राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं।'

विकास कार्यों पर खर्च होंगे लाखों रुपये

यहां पर यात्री शेड निर्माण के लिए करीब 25 लाख रुपये से अधिक की धनराशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा स्वागत द्वार के निर्माण पर लगभग 9.25 लाख रुपये और चेंज रूम के लिए 7.28 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अन्य मदों में भी पर्याप्त बजट का प्रावधान किया गया है।

साथ ही, साइट डेवलपमेंट, कोटा स्टोन फ्लोरिंग और अन्य निर्माण कार्यों के जरिए पूरे परिसर का कायाकल्प करने की तैयारी है। विद्युत, प्लंबिंग और लैंडस्केपिंग से जुड़े कार्यों के तहत आंतरिक और बाहरी प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, जबकि जलापूर्ति, सीवरेज और हरित विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

महर्षि दधीचि का 'अस्थि दान'

सीतापुर के मिश्रिख में स्थित महर्षि दधीचि कुंड आस्था और त्याग का प्रतीक बना है। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर यह पवित्र स्थल उस महान बलिदान की गाथा सुनाता है, जब महर्षि दधीचि ने देवताओं की रक्षा के लिए अपनी ही हड्डियां दान कर दी थीं। मान्यता है कि दानव वृत्रासुर के आतंक से त्रस्त 88 हजार ऋषियों की रक्षा के लिए भगवान इंद्र को दधीचि की अस्थियों से बना वज्र ही समाधान मिला।

आस्था के साथ विकास की रफ्तार

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि नैमिषारण्य को हजारों ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का हृदय गिरा था, जिसके बाद यह स्थान ललिता देवी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। नैमिषारण्य में चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी और पंच प्रयाग जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल भी स्थित हैं, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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