मखाना उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल : डाॅ. दया एस. श्रीवास्तव

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मखाना उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल : डाॅ. दया एस. श्रीवास्तव


कानपुर, 09 अप्रैल (हि.स.)। मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की अपार संभावनाएं हैं। बदलते कृषि परिदृश्य में वैकल्पिक एवं लाभकारी खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है। मखाना कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल है, जिससे किसान और महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। युवाओं और किसानों को मखाना उत्पादन से जोड़कर उन्हें उद्यमिता की ओर प्रेरित किया जाएगा, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सके। यह बातें गुरुवार को डाॅ. दया एस. श्रीवास्तव ने कही।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा संचालित कृषि महाविद्यालय जमुनाबाद गोला में मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण में उद्यमिता विकास विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम राष्ट्रीय मखाना बोर्ड, भारत सरकार के सहयोग से कृषि विज्ञान केंद्र-2 सीतापुर एवं उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मखाना की खेती, उसकी तकनीक, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। वक्ताओं ने बताया कि मखाना की खेती में कीट एवं रोगों का खतरा कम होता है, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बनती है। तालाब योजना के माध्यम से इसकी खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

इस अवसर पर मखाना तकनीक एवं प्रसंस्करण पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन किया गया तथा अंत में जागरूकता रैली निकालकर लोगों को इसके महत्व के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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