मेजर आशाराम त्यागी के शौर्य एवं बलिदान को राष्ट्र सदैव रखेगा स्मरण: अमित घोष
लखनऊ, 22 सितंबर (हि.स.)। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि मेजर आशाराम त्यागी जैसे वीर सपूतों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के कारण ही आज राष्ट्र की सुरक्षा सुदृढ़ है। डोगराई की लड़ाई में प्रदर्शित उनका शौर्य और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
अमित कुमार घोष ने यह विचार आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन (एडब्ल्यूएचओ) कॉलोनी, आशियाना, लखनऊ स्थित त्यागी विहार में महावीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित मेजर आशाराम त्यागी के शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि एवं स्मृति समारोह में व्यक्त किए। मेजर आशाराम त्यागी ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान डोगराई की ऐतिहासिक लड़ाई में अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। उन्होंने कहा कि आज का यह समारोह केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र के वीर नायकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः समर्पित करने का अवसर भी है। हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि मेजर आशाराम त्यागी जैसे वीर सपूतों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि त्यागी विहार के निवासियों ने अपने वीर नायक मेजर आशाराम त्यागी की स्मृति को सदैव जीवंत रखा है। यह अत्यंत गर्व एवं सम्मान का विषय है कि कॉलोनी के नवनिर्मित प्रवेश/निकास द्वार का नामांकरण 'मेजर आशाराम त्यागी, एमवीसी (मरणोपरांत) स्मृति द्वार’ किया जा रहा है। उनकी स्मृति में स्थापित प्रतिमा एवं नवनिर्मित प्रवेश एवं निकास द्वार आने वाली पीढ़ियों और युवाओं को उनके असाधारण साहस, देशभक्ति तथा राष्ट्रसेवा की भावना से निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
इससे पहले अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने मेजर आशाराम त्यागी की प्रतिमा पर पूरे सम्मान के साथ पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कॉलोनी के नवनिर्मित प्रवेश/निकास द्वार का 'मेजर आशाराम त्यागी, एमवीसी (मरणोपरांत) स्मृति द्वार’ का चीफ ऑफ स्टाफ, मुख्यालय सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल सी.जे. जयचंद्रन ने उद्घाटन किया।
डोगराई की लड़ाई में मेजर आशाराम त्यागी ने दिया था अदम्य शौर्य का परिचय
उल्लेखनीय है कि मेजर आशाराम त्यागी 3 बटालियन जाट रेजिमेंट, वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 21-22 सितंबर की रात डोगराई की ऐतिहासिक लड़ाई में अग्रिम आक्रमण कंपनी का नेतृत्व कर रहे थे। युद्ध के दौरान कंधे में दो गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के टैंकों पर ग्रेनेड से हमला किया और दो टैंकों को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद तीन और गोलियां लगने के बावजूद वे अपनी कंपनी का नेतृत्व करते रहे और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया। मातृभूमि की रक्षा के लिए उनके द्वारा दिया गया योगदान भारतीय सैन्य इतिहास में सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।
इस अवसर पर मेजर आशाराम त्यागी के पौत्र मनीष त्यागी, आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष ब्रिगेडियर बी.एन.सिंह, कर्नल अरविन्द पाण्डेय, कर्नल एम.एम.घोष उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

