छात्रों ने की लविवि परिसर में महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाने की मांग
लखनऊ, 09 मई (हि.स.)। छात्रसंघ परिवार की ओर से शनिवार को छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की मूर्ति लगवाने की मांग को लेकर कुलपति जे.पी. सैनी के नाम का ज्ञापन दिया।
इस अवसर पर छात्र नेता आलोक मिश्रा ने महाराणा के शौर्य को नमन करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप मेवाड़ के 13वें राजपूत राजा थे, जिनकी शौर्य गाथा भारतीय इतिहास में साहस, स्वाभिमान और बलिदान का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए शक्तिशाली मुगल साम्राज्य और अकबर के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया, लेकिन कभी अधीनता स्वीकार नहीं की।
छात्र नेता मंगेश यादव ने महाराणा को नमन करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल युद्धों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक राजा की अपनी मातृभूमि और स्वाभिमान के लिए दी गई निरंतर परीक्षा थी। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद जब मेवाड़ के प्रमुख किलों पर मुगलों का कब्जा हो गया, तब महाराणा प्रताप ने अरावली की पहाड़ियों और जंगलों में शरण ली।
लंबे समय तक युद्ध जारी रखने के कारण प्रताप के पास धन और संसाधनों की भारी कमी हो गई थी। ऐसे समय में उनके विश्वासपात्र मंत्री भामाशाह ने अपनी संपूर्ण निजी संपत्ति (जो इतनी थी कि 25,000 सैनिकों का खर्च 12 वर्षों तक उठाया जा सके) महाराणा को सौंप दी।
छात्रनेता जतिन शुक्ल ने कहा स्वाधीनता के कालजयी स्वर,त्याग व बलिदान की उज्ज्वल कीर्ति पताका 'हिंदुआ सूर्य' वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की पावन जयंती पर आज लखनऊ विश्वविद्यालय की क्रांतिकारी सरजमीं पर छात्रसंघ परिवार द्वारा विशाल पदयात्रा और माल्यार्पण का कार्यक्रम किया गया।
-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

