समाज कल्याण के लिए करें ज्ञान का उपयोग : डॉ. संजय माहेश्वरी

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गोरखपुर, 31 मार्च (हि.स.)। जीवन में सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि अनुशासन, नैतिकता और सेवा भावना से प्राप्त होती है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक सशक्त, जागरूक और संस्कारित समाज का निर्माण करना है।

यह बातें महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़ गोरखपुर के 19वें समावर्तन संस्कार समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए एमपी बिरला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के निदेशक एवं विश्व प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी ने कही। डॉ. माहेश्वरी ने शिक्षा में विज्ञान की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। कहा कि आज का युग वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार का युग है, जहां शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर प्रयोग, अनुसंधान और तकनीकी दक्षता से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा के भूत, वर्तमान और भविष्य के आयामों की तुलना क्वांटम सिद्धांत से करते हुए कहा कि जैसे क्वांटम स्तर पर सूक्ष्म परिवर्तन व्यापक परिणाम उत्पन्न करते हैं, उसी प्रकार शिक्षा में छोटे-छोटे नवाचार भविष्य में बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बनते हैं। अतीत की शिक्षा मूल्यों और परंपराओं पर आधारित थी, वर्तमान में वह तकनीकी और व्यावहारिक हो गई है, जबकि भविष्य की शिक्षा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और उन्नत वैज्ञानिक शोध से संचालित होगी।

डॉ. माहेश्वरी ने चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे आधुनिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए गोरखपुर स्थित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, बालापार में विकसित हो रही रोबोटिक सर्जरी प्रणाली की सराहना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय परंपरा में वर्णित 16 संस्कारों में समावर्तन संस्कार एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है, जो विद्यार्थी जीवन से सामाजिक जीवन में प्रवेश का प्रतीक है।

समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी ने प्रस्ताविकी रखते हुए कहा कि महाविद्यालय संस्कार आधारित शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह महाविद्यालय पूज्य महन्तद्वय एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त योगी आदित्यनाथ जी महाराज के सपनो का महाविद्यालय है, ऐसे में समाज के प्रति हमारी जवाबदेही और जिम्मेदारी है कि हम महाविद्यालय में संस्कृति और संस्कार युक्त ऐसे क्षमतवान युवाओं का सृजन करें, जो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए सामाजिक विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। महाविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति: 2020 के अनेक प्रावधानों को अपने संस्थागत सामाजिक दायित्वों के अन्तर्गत 2012 से ही लागू कर अपनी दूरदृष्टता का प्रमाण दे चुका है। कार्यक्रम में गोरखनाथ मन्दिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, एमपी बिरला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. रेखा माहेश्वरी की भी विशेष उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन, पुष्पांजलि एवं सरस्वती वन्दना से हुआ। उसके पश्चात् महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा विद्यार्थियों को समावर्तन उपदेश एवं संकल्प ग्रहण कराया गया। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के कला संकाय की सहायक आचार्य श्रीमती शिवानी सिंह ने किया। इस अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के सहित महानगर के विविध शिक्षण प्रशिक्षण संस्थानों के आचार्यगण तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समावर्तन संस्कार समारोह में मुख्य आकर्षण छात्र-छात्राओं का गणवेश रहा। केसरिया कुर्ता एवं सफेद धोती में छात्र तथा केसरिया साड़ी में छात्राएं समावर्तन संस्कार समारोह का मुख्य आकर्षण रहें। मुख्य अतिथि ने गाउन का यह विकल्प प्रस्तुत करने पर महाविद्यालय को बधाई दी।

समारोह में इन्हें मिला सम्मान

-महाविद्यालय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी का महाराणा प्रताप सम्मान- विनय सिंह।

-महाविद्यालय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ छात्रावासी का योगीराज बाबा गंभीरनाथ सम्मान- अभिनव सिंह।

-परास्नातक स्तर पर श्रेष्ठतम विद्यार्थी का महर्षि कणाद सम्मान- धीरज यादव।

-स्नातक स्तर पर कला संकाय से श्रेष्ठतम विद्यार्थी का महर्षि वशिष्ठ सम्मान- गरिमा यादव।

-स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय से श्रेष्ठतम विद्यार्थी का महर्षि विश्वामित्र सम्मान- दीपा गोंड।

-स्नातक स्तर पर वाणिज्य संकाय से श्रेष्ठतम विद्यार्थी का आचार्य चाणक्य सम्मान- वंशदीप रॉय।

-स्नातक स्तर पर कंप्यूटर संकाय से श्रेष्ठतम विद्यार्थी का महर्षि आर्यभट्ट सम्मान- आयुष श्रीवास्तव।

-स्नातक स्तर पर बी.एड. संकाय से श्रेष्ठतम विद्यार्थी का डॉ. राधाकृष्णन सम्मान- नेहा सिंह।

-सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम के श्रेष्ठतम प्रशिक्षु का वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई सम्मान- सीमा।

-निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम के श्रेष्ठतम प्रशिक्षु का महंत अवेधनाथ सम्मान- महेश्वर प्रताप सिंह।

-संगीत प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम के श्रेष्ठतम प्रशिक्षु का माता अरुन्धती सम्मान- श्रेया रंजन।

-जीवन मूल्य प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम के श्रेष्ठतम विद्यार्थी का महायोगी गोरखनाथ सम्मान- शिवांगी रंजन।

-हमारे पूर्वज प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम के श्रेष्ठतम विद्यार्थी का महन्त दिग्विजयनाथ सम्मान- शालिनी चौहान।

-आपदा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबन्धन प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम के श्रेष्ठतम प्रशिक्षु का मेजर सोमनाथ शर्मा सम्मान- आशुतोष चौबे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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