महाकवि भूषण का पैतृक गांव टिकवांपुर साझा सांस्कृतिक केंद्र के रूप में हाेगा विकसित : जिलाधिकारी

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महाकवि भूषण का पैतृक गांव टिकवांपुर साझा सांस्कृतिक केंद्र के रूप में हाेगा विकसित : जिलाधिकारी


कानपुर, 03 जून (हि.स.)। महाकवि भूषण का पैतृक गांव टिकवांपुर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की साझा सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बनेगा। यहां स्थापित पुस्तकालय युवाओं को साहित्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में नई दिशा देगा। यह बातें जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बुधवार को टिकवांपुर में पुस्तकालय और आंगनबाड़ी केंद्र के शुभारंभ अवसर पर कहीं।

जिलाधिकारी ने कहा कि महाकवि भूषण का जन्म टिकवांपुर घाटमपुर में हुआ था, जबकि उनकी कर्मस्थली महाराष्ट्र रही। ऐसे में यह स्थान दोनों राज्यों की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय में शिवा बावनी सहित महाकवि भूषण के ग्रंथों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने समाज के लिए योगदान देने की भावना को महत्वपूर्ण बताते हुए भवन दान करने वाले रवींद्र मिश्र की सराहना की।

कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी ने महाकवि भूषण के पैतृक आवास का दौरा किया और वहां स्थित क्षतिग्रस्त प्राथमिक विद्यालय भवन का निरीक्षण किया। भवन के कमरों में भूसा भंडारण और मवेशी पालन होता देखकर उन्होंने नाराजगी जताई तथा तहसीलदार घाटमपुर को जर्जर भवन के जीर्णोद्धार और परिसर को कब्जामुक्त कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने महाकवि भूषण की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान रवींद्र मिश्र 'विपिन' ने प्रतिमा स्थल तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों का मुद्दा उठाया, जिस पर जिलाधिकारी ने व्यवस्थाएं बेहतर कराने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में ग्राम प्रधान नागेंद्र त्रिपाठी, आनंद मिश्र 'छूनी', महेश त्रिपाठी, सरस यादव, राम कृपाल, अनिल मिश्रा, रामगोपाल, धर्मेंद्र सिंह, अजीत यादव, केशवराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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