भाई की कलाई पर महादेव और ॐ: काशी में छाईं सोने-चांदी की राखियां, ‘बेस्ट ब्रो’ भी हिट
वाराणसी। रक्षाबंधन पर इस बार काशी में भाई की कलाई पर सिर्फ रेशमी धागे ही नहीं, सोने-चांदी की राखियां भी चमक बिखेरेंगी। बाजार में खासकर चांदी की राखियों की मांग बढ़ी है। 400 रुपये से लेकर 11 हजार रुपये तक की रेंज में उपलब्ध इन राखियों पर महादेव, त्रिशूल और ॐ जैसे धार्मिक प्रतीकों के साथ ‘बेस्ट ब्रो’, भाई का नाम और दिल जैसे डिजाइन भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। ग्राहक इन्हें राखी के साथ ऐसी यादगार के रूप में भी देख रहे हैं, जिसकी कीमत त्योहार के बाद भी बनी रहेगी।
रक्षाबंधन को लेकर काशी के बाजारों में इन दिनों रौनक बढ़ गई है। पारंपरिक रंग-बिरंगी और सजावटी राखियों के बीच सोने-चांदी से बनी राखियां अलग आकर्षण पैदा कर रही हैं। धार्मिक प्रतीकों और आधुनिक डिजाइन के मेल ने इन्हें खास बनाया है। बहनें भाई की पसंद और व्यक्तित्व के हिसाब से डिजाइन चुन रही हैं।

चांदी की राखियों की बढ़ी मांग
अस्सी स्थित मुमुक्षु भवन में संचालित सागर ज्वेलर्स के अधिष्ठाता अभिषेक वर्मा ने बताया कि करीब एक सप्ताह से राखियों की बिक्री चल रही है। इनमें चांदी की राखियों को लेकर ग्राहकों में खासा उत्साह है। सामान्य राखियां बाजार में करीब 300 से 350 रुपये तक मिल रही हैं, लेकिन त्योहार के बाद उनका कोई खास पुनर्विक्रय मूल्य नहीं रहता। इसके मुकाबले सोने-चांदी से बनी राखियों में इस्तेमाल की गई कीमती धातु का मूल्य बना रहता है।
उनके मुताबिक प्रतिष्ठान पर करीब 400 रुपये से 11 हजार रुपये तक की राखियां उपलब्ध हैं। वजन, डिजाइन और इस्तेमाल की गई धातु के आधार पर इनकी कीमत अलग-अलग है। कम बजट में चांदी की राखियों से लेकर प्रीमियम श्रेणी में अधिक वजन और खास डिजाइन वाली राखियों तक के विकल्प मौजूद हैं।
राखी के साथ यादगार और मूल्य भी
सोने-चांदी की राखियों के प्रति आकर्षण की एक वजह उनका लंबे समय तक संभालकर रखा जाना भी है। रक्षाबंधन बीतने के बाद इन्हें सामान्य राखियों की तरह अलग रखने के बजाय चांदी या सोने की वस्तु के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है। इसी वजह से कुछ ग्राहक इसे रिश्ते की निशानी के साथ मूल्यवान उपहार के रूप में भी चुन रहे हैं।
इन राखियों को व्यक्तिगत बनाने के लिए भाई का नाम या खास संदेश भी उकेरा जा रहा है। इससे राखी केवल आभूषण नहीं रह जाती, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी एक व्यक्तिगत यादगार बन जाती है।

काशी की राखियों पर महादेव की छाप
बाबा विश्वनाथ की नगरी होने के कारण यहां की राखियों में काशी की धार्मिक पहचान भी नजर आ रही है। भोलेनाथ, शिव, महादेव, त्रिशूल, श्री और ॐ जैसे शब्दों और प्रतीकों वाली राखियां बाजार में हैं। इसके साथ ही ‘वीर’, ‘भाई’, दिल और ‘बेस्ट ब्रो’ जैसे आधुनिक डिजाइन भी युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
धार्मिक और आधुनिक डिजाइन का यह मेल बहनों को अपनी पसंद के मुताबिक राखी चुनने का मौका दे रहा है। कोई महादेव और त्रिशूल वाली राखी पसंद कर रहा है तो कोई भाई के नाम या ‘बेस्ट ब्रो’ वाली राखी को तरजीह दे रहा है।

पारंपरिक राखियों के बीच प्रीमियम सेगमेंट ने बनाई जगह
रक्षाबंधन के बाजार में धागे, मोती और अन्य सजावटी राखियों की मांग पहले की तरह बनी हुई है, लेकिन इनके बीच कीमती धातुओं से बनी राखियों ने अपना अलग बाजार तैयार किया है। खासकर ऐसे ग्राहक इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो रक्षाबंधन पर भाई को कुछ ऐसा देना चाहते हैं जिसे लंबे समय तक संभालकर रखा जा सके।
इस बार काशी के राखी बाजार में रिश्ते की मिठास, महादेव की नगरी की धार्मिक पहचान और सोने-चांदी की चमक एक साथ दिखाई दे रही है।

