संतों का विचार है कि भारत घोषित हो सनातन राष्ट्र : महामंडलेश्वर शंकर महादेव

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संतों का विचार है कि भारत घोषित हो सनातन राष्ट्र : महामंडलेश्वर शंकर महादेव


--जिसे वंदे मातरम् स्वीकार नहीं उसे मताधिकार का अधिकार भी न हो

प्रयागराज, 07 अप्रैल (हि.स)। श्री मिश्री मठ महादेव हरिद्वार के तृतीय महाधिपति महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु करौली शंकर महादेव महाराज का आगमन श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्माण मुट्ठीगंज में मंगलवार को हुआ। उन्होंने कहा कि भारत के अंदर हिंदू राष्ट्र की मांग चल रही है, जबकि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। संतों का विचार है कि भारत सनातन राष्ट्र घोषित हो।

महामंडलेश्वर पूर्ण गुरु करौली शंकर महादेव महाराज ने उपस्थित संतों और व्यापारी एवं नागरिकों से कहा कि धर्म को धारण करना सीखिए। धर्म कोई पढ़ने की वस्तु नहीं है, स्वयं के अंदर धर्म को धारण करो तभी जीवन में आंतरिक शांति प्राप्त होगी। धर्म समस्या नहीं समाधान है। धर्म से ही सम्पूर्ण विश्व में शांति प्राप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि हमारे कानपुर के आश्रम में लाखों की संख्या में साधक वैदिक परम्परा की ज्ञान को लेकर साधना कर रहे हैं आने वाले समय में मनुष्य को बड़े से बड़े रोगों से मुक्त करेंगे।

उन्होंने सम्बोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम् गीत नहीं बल्कि भारत की सनातन संस्कृति की आत्मा है और जिन्हें भारत में रहकर वंदे मातरम स्वीकार नहीं उन्हें मताधिकार से वंचित कर देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम् गीत नहीं बल्कि भारत की सनातन संस्कृति की आत्मा है और जिन्हें भारत में रहकर वंदे मातरम् स्वीकार नहीं उन्हें मताधिकार से वंचित कर देना चाहिए।

इसके पूर्व उनके आगमन पर स्थानीय व्यापारियों एवं अखाड़ा के संतों ने पुष्प वर्षा करते हुए स्वागत किया। इस अवसर श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के सचिव महंत जगतार मुनी और श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के सचिव महंत देवेंद्र शास्त्री ने उन्हें अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। स्वागत करने वालों में नया उदासीन अखाड़े के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी राजेश केसरवानी, व्यापारी नेता संतोष अग्रहरि, अभिलाष केसरवानी, संदीप अग्रहरि, सुशील चंद्र गुप्ता एवं अखाड़े के संत स्थानीय नागरिक, एवं व्यापारी बंधु उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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