लखनऊ कार्यशाला में 25 अक्टूबर को होगा 11 पुस्तकों का विमोचन

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लखनऊ कार्यशाला में 25 अक्टूबर को होगा 11 पुस्तकों का विमोचन


लखनऊ कार्यशाला में 25 अक्टूबर को होगा 11 पुस्तकों का विमोचन


बांदा, 24 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में विद्यालयों को आनंदघर बनाने के उद्देश्य से शैक्षिक संवाद मंच वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से ही निरंतर कार्य कर रहा है। शिक्षकों में पढ़ने-लिखने की रुचि जागृत करने और पठन संस्कृति को विकसित करने की दिशा में मंच की ओर से महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में लखनऊ में 25 और 26 अक्टूबर को आयोजित होने वाली शैक्षिक संवाद मंच की वार्षिक संगोष्ठी सह कार्यशाला में 11 पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा।

शैक्षिक संवाद मंच के संयोजक दुर्गेश्वर राय ने शनिवार को बताया कि पुस्तकों का विमोचन लखनऊ में आयोजित संगोष्ठी के दौरान शिक्षाविदों एवं साहित्यकारों कमलेश जोशी (लखनऊ), विज्ञान कथाकार डॉ. जाकिर अली रजनीश (लखनऊ), शिव मोहन यादव (एनसीईआरटी, नई दिल्ली) तथा शिक्षक एवं साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय (बांदा) द्वारा किया जाएगा। विमोचित होने वाली पुस्तकों में छह एकल संग्रह और पांच साझा संग्रह शामिल हैं।

एकल संग्रहों में सीमा मिश्रा (फतेहपुर) की मौन शिलाएं टूट रहीं, दुर्गेश्वर राय (गोरखपुर) की बाल पंचामृत-2, चित्रकूट के घाट पर और चार पत्र, प्रमोद दीक्षित मलय (बांदा) की अजेय योद्धा तथा स्व. हरिनाथ दूबे 'करुण' की करुण स्वर शामिल हैं।

साझा संग्रहों में मेरा बचपन मेरी बातें शामिल है, जिसके संपादक दुर्गेश्वर राय तथा सह-संपादक डॉ. श्रवण कुमार गुप्त, भारती, नीलम रानी सक्सैना, सुनीता वर्मा एवं अशोक कुमार आर्य हैं।

इसी तरह काव्याम्बर-2 के संपादक दुर्गेश्वर राय तथा सह-संपादक अशोक कुमार आर्य, नीलम रानी सक्सैना एवं डॉ. श्रवण कुमार गुप्त हैं। मुक्तगान के संपादक दुर्गेश्वर राय हैं, जबकि भाव कलश का संपादन सीमा मिश्रा एवं विजय शंकर यादव ने किया है। वहीं, सुरभित हिंदी की संपादक सुनीता वर्मा, अमिता सचान, नीलम रानी सक्सैना एवं समरेंद्र बहादुर हैं।

दुर्गेश्वर राय ने बताया कि इन 11 पुस्तकों में कविता विधा पर आधारित छह संग्रह शामिल हैं। इसके अलावा जीवनी, रिपोर्ताज, बाल साहित्य, पत्र साहित्य एवं संस्मरण विधा पर आधारित एक-एक संग्रह भी प्रकाशित हो रहे हैं। मंच की यह पहल शिक्षकों और साहित्यकारों की सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ ही पढ़ने-लिखने की संस्कृति को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

Livevns.news Desk
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