12 साल बाद मिला बिछड़ा भाई, गले मिलते ही छलक पड़े आंसू; ‘ऑपरेशन मुस्कान’ ने फिर जोड़ा परिवार

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12 साल बाद मिला बिछड़ा भाई, गले मिलते ही छलक पड़े आंसू; ‘ऑपरेशन मुस्कान’ ने फिर जोड़ा परिवार


12 साल बाद मिला बिछड़ा भाई, गले मिलते ही छलक पड़े आंसू; ‘ऑपरेशन मुस्कान’ ने फिर जोड़ा परिवार


बांदा, 31 अगस्त (हि.स.)।

करीब 12 वर्षों से बिछड़े अपने भाई को अचानक सामने पाकर परिवार की आंखें खुशी से भर आईं। वर्षों की जुदाई के बाद जब दोनों भाई आमने-सामने हुए तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। यह भावुक कर देने वाला मिलन उत्तर प्रदेश में बांदा पुलिस के ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान की बदौलत संभव हो सका, जिसके तहत थाना बदौसा पुलिस ने एक लंबे समय से लापता व्यक्ति की पहचान कर उसे सकुशल उसके परिजनों तक पहुंचा दिया।

क्षेत्राधिकारी अतर्रा सुश्री प्रतिज्ञा सिंह के मुताबिक 25 अगस्त 2026 की शाम फतेहगंज तिराहे पर चेकिंग के दौरान पुलिस टीम की नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी, जो संदिग्ध और असहाय स्थिति में था। पुलिस ने उसे रोककर बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन उसकी भाषा स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आ रही थी। वह अपने बारे में कोई स्पष्ट जानकारी देने या अपना सही पता बताने में भी असमर्थ था।

व्यक्ति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस टीम उसे थाना बदौसा ले आई। यहां पुलिसकर्मियों ने उसे भरोसा दिलाया और धैर्यपूर्वक बातचीत करते हुए उसकी पहचान जानने का प्रयास जारी रखा। काफी कोशिशों के बाद उसने अपना नाम मो. सफीउर्रहमान पुत्र हुसैन अली, निवासी ग्राम वरगुला, जनपद बोंगाईगांव, असम बताया।

इसके बाद बदौसा पुलिस ने तकनीकी संसाधनों और इंटरनेट की मदद से असम में उसके बताए गए क्षेत्र से संपर्क साधना शुरू किया। जांच-पड़ताल के दौरान पुलिस की बातचीत उसके भाई शुजाउल हक, निवासी बलारपेट, थाना अभयापुरी, जनपद बोंगाईगांव, असम से हुई।

पुलिस ने वीडियो कॉल के माध्यम से दोनों पक्षों को संपर्क में कराया। स्क्रीन पर अपने सामने उस व्यक्ति को देखते ही शुजाउल हक ने उसे अपने उस भाई के रूप में पहचान लिया, जो करीब 12 वर्षों से परिवार से लापता था। इसके बाद पुलिस ने पहचान संबंधी दस्तावेजों का मिलान किया और फोटो व वीडियो के जरिए भी उसकी पहचान की पुष्टि की।

रविवार 30 अगस्त 2026 को मो. सफीउर्रहमान के परिजन लंबी दूरी तय कर थाना बदौसा पहुंचे। आवश्यक सत्यापन और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने मो. सफीउर्रहमान को देर रात सकुशल उसके परिवार के हवाले कर दिया।

12 साल के इंतजार के बाद अपने बिछड़े भाई को सामने पाकर परिवार की आंखें नम हो गईं। भाई के मिलने की खुशी में परिजनों की भावनाएं छलक पड़ीं और वर्षों से अधूरी पड़ी उम्मीद आखिरकार पूरी हो गई।

परिजनों ने बदौसा पुलिस टीम और बांदा पुलिस के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया। पुलिस की इस मानवीय पहल ने सिर्फ एक लापता व्यक्ति को उसके परिवार से नहीं मिलाया, बल्कि एक बिखरे हुए परिवार की खुशियां भी दोबारा लौटा दीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह

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