लोस चुनाव : हमीरपुर में भाजपा लगाएगी जीत की हैट्रिक या विपक्ष की होगी वापसी!

लोस चुनाव : हमीरपुर में भाजपा लगाएगी जीत की हैट्रिक या विपक्ष की होगी वापसी!
लोस चुनाव : हमीरपुर में भाजपा लगाएगी जीत की हैट्रिक या विपक्ष की होगी वापसी!


लखनऊ, 15 मई (हि.स.)। हमीरपुर जिला उत्तर में जालौन (उरई),कानपुर नगर और फतेहपुर जिले से तो पूर्व में बांदा जिला और दक्षिण में महोबा जिला तो पश्चिम में झांसी और जालौन से घिरा हुआ है। यहां पर यमुना और बेतवा दो अहम नदियां मिलती हैं। बेतवा नदी के किनारे पर 'मोटे रेत' पाए जाते हैं जिसकी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में काफी मांग रहती है। हमरीपुर संसदीय इतिहास का बुंदेलखण्ड और उप्र की राजनीति में खास अहमियत शुरू से रही है। पिछले एक दशक से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। उप्र की संसदीय सीट संख्या 47 हमीरपुर में पांचवें चरण के तहत 20 मई को मतदान होगा।

हमीरपुर संसदीय सीट का इतिहास

वर्ष 1952 से लेकर 1962 तक हमीरपुर-महोबा संसदीय सीट पर लगातार कांग्रेस का कब्जा रहा है। लेकिन 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर यहां की सीट पर कब्जा कर लिया था। वर्ष 1991 से लेकर 1998 तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार सीट पर काबिज रही है। कांग्रेस की तरह भाजपा ने भी हैट्रिक लगायी है। संसदीय सीट के शुरू से लेकर अब तक हुये चुनावों की नतीजों पर नजर डाले तो कांग्रेस के खाते में 6 बार यहां की सीट गई है जबकि भाजपा ने 5 बार जीत दर्ज करायी है।

पिछले दो चुनावों का हाल

17वीं लोकसभा के 2019 में हुए चुनाव में भाजपा के कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल ने यहां जीत का परचम लहराया। भाजपा प्रत्याशी को 575,122 (52.76 प्रतिशत) वोट मिले। वहीं दूसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी दिलीप कुमार सिंह को 326,470 (29.95 प्रतिशत) वोट हासिल हुए। 114,534 (10.51 प्रतिशत) वोट पाकर कांग्रेस के प्रीतम सिंह लोधी तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा ने 2 लाख 48 हजार 652 वोटों के अंतर से बड़ी जीत हासिल की।

2014 के चुनाव में भाजपा के कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल यहां से जीते थे। कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल ने सपा के बिशम्बर प्रसाद निषाद को 2 लाख 66 हजार 788 वोटों के अंतर से परास्त किया था। भाजपा को 453,884 (46.41प्रतिशत) वोट मिले। वहीं सपा प्रत्याशी के खाते में 187,096 (19.13प्रतिशत) मत आए। बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई।

किस पार्टी ने किसको बनाया उम्मीदवार

भाजपा ने मौजूदा सांसद कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल को मैदान में उतारा है। सपा-कांग्रेस गठबंधन में ये सीट सपा के खाते में है। सपा से अजेन्द्र सिंह लोधी और बसपा से निर्दोष कुमार दीक्षित चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं।

हमीरपुर सीट का जातीय समीकरण

इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख मतदाता है। इस संसदीय क्षेत्र में 22 फीसदी से अधिक दलित वोटर्स हैं। इनके अलावा मल्लाह, ब्राह्मण और राजपूत वोटर्स की भी अच्छी संख्या है। मुस्लिम वोटर्स की संख्या 8 फीसदी से अधिक है।

विधानसभा सीटों का हाल

हमीरपुर संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें हमीरपुर, राठ (अ0जा0), मौदहा, चरखारी और तिंदवारी सीटें शामिल हैं। सभी सीटों पर भाजपा काबिज है।

जीत का गणित और चुनौतियां

हमीरपुर संसदीय सीट में अबकी बार भाजपा प्रत्याशी पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल यहां की सीट पर हैट्रिक लगाने को बेताब है। वहीं साइकिल और हाथी की रफ्तार पकड़ने से उनके माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है। इंडिया गठबंधन में सपा से अजेन्द्र सिंह राजपूत ऐसे प्रत्याशी है, जिनकी लोधी बिरादरी में मजबूत पकड़ बताई जा रही है। इस बिरादरी से इस बार यहीं चुनाव मैदान में है, जिससे जातीय समीकरण भी तेजी से बदल रहे है। इस बार मायावती ने साइकिल को झटका देने के लिए पहली बार ब्राह्मण बिरादरी से निर्दोष दीक्षित को चुनाव मैदान में उतारा है, जिससे भाजपा और सपा प्रत्याशियों की नींदें उड़ने लगी है। बता दें कि मायावती के सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले से 1999 और 2009 के आम चुनाव में ठाकुर बिरादरी से दो बार यहां की सीट से सांसद बने थे।

पत्रकार दिनेश निगम के अनुसार, यहां मुकाबले त्रिकोणीय है। बसपा के ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने से सीधा नुकसान सपा-कांग्रेस के गठबंधन को हो सकता है। इसका कारण है कि महोबा व हमीरपुर का नाराज ब्राह्मण मतदाता यदि भाजपा से नाराज होकर गठबंधन में जाता तो इसका सीधा फायदा सपा को मिलता। वहीं राम मंदिर निर्माण का असर भी क्षेत्र में दिख रहा है।

हमीरपुर से कौन कब बना सांसद

1952 मन्नू लाल द्विवेदी (कांग्रेस)

1957 मन्नू लाल द्विवेदी (कांग्रेस)

1962 मन्नू लाल द्विवेदी (कांग्रेस)

1967 स्वामी ब्रह्मानन्दजी (भारतीय जनसंघ)

1971 स्वामी ब्रह्मानन्दजी (कांग्रेस)

1977 तेज प्रताप सिंह (भारतीय लोकदल)

1980 डूंगर सिंह (कांग्रेस आई)

1984 स्वामी प्रसाद सिंह (कांग्रेस)

1989 गंगा चरन राजपूत (जनता दल)

1991 विश्वनाथ शर्मा (भाजपा)

1996 गंगाचरन राजपूत (भाजपा)

1998 गंगाचरन राजपूत (भाजपा)

1999 अशोक कुमार सिंह चंदेल (बसपा)

2004 राज नारायण सिंह (सपा)

2009 विजय बहादुर सिंह (बसपा)

2014 कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देली (भाजपा)

2019 कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देली (भाजपा)

हिन्दुस्थान समाचार/डॉ.आशीष वशिष्ठ/राजेश

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