लोस चुनाव : पूर्वांचल का प्रवेश द्वार बाराबंकी किसे पहनाएगा जीत का हार

लोस चुनाव : पूर्वांचल का प्रवेश द्वार बाराबंकी किसे पहनाएगा जीत का हार
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लोस चुनाव : पूर्वांचल का प्रवेश द्वार बाराबंकी किसे पहनाएगा जीत का हार


लखनऊ, 16 मई (हि.स.)। 'पूर्वांचल का प्रवेश द्वार' कहे जाने वाले बाराबंकी शहर को कई साधुओं और संतों की तपोस्थली होने का गौरव मिला हुआ है। बाराबंकी शहर के नाम के बारे में कहा जाता है कि यह 'भगवान बराह' के पुनर्जन्म की धरती है। कांवड़ियों की तीर्थयात्रा का स्थान महादेवा, महाभारत का कुरुक्षेत्र पारिजात वृक्ष और महाभारत युग कुछ अंश भी बारबंकी जिले में मौजूद हैं। देवा शरीफ की प्रसिद्ध दरगाह भी यहां है। राजधानी लखनऊ से सटी बाराबंकी लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट है। इस सीट पर सभी राष्ट्रीय दलों के नेताओं की निगाहें टिकी हुई हैं। उप्र की संसदीय सीट संख्या 53 बाराबंकी में 5वें चरण की वोटिंग में 20 मई को मतदान होगा।

बाराबंकी संसदीय सीट का इतिहास

बाराबंकी सुरक्षित सीट के बारे में कहा जाता है कि यहां पर किसी पार्टी का लंबे समय तक दबदबा नहीं रहता है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास पिछले दस साल से यह लोकसभा सीट है। बाराबंकी लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। वर्ष 1952 से 2019 तक यह सीट कई दलों के कब्जे में रही है। इस सीट पर अब तक कुल 17 बार चुनाव हुए हैं। इसमें से छह बार कांग्रेस का कब्जा रहा। जबकि 3 बार भाजपा, दो बार सपा को जीत मिली। वहीं एक बार बसपा प्रत्याशी भी जीत दर्ज कराने में सफल रहा है। चुनावों के साथ समीकरण बदले और इस सीट पर भाजपा और सपा भी अपनी मजबूती बनाई।

1989, 1991, 1996 और 1999 में रामसागर रावत ने इस सीट पर जीत दर्ज करके जीत की हैट्रिक लगाई थी। हालांकि वह तीन बार तीन अलग-अलग पार्टियाें से चुनाव लड़े थे। वर्ष 1998 में बैजनाथ रावत ने भाजपा के टिकट से पहली बार जीत दर्ज किया था। 2009 में कांग्रेस के पीएल पुनिया ने सीट से जीत दर्ज कर 25 साल बाद कांग्रेस पार्टी को संजीवनी दी थी। 2014 के चुनाव में भाजपा की प्रियंका सिंह रावत ने यहां जीत का कमल खिलाया। प्रियंका रावत को जिले की पहली महिला सांसद होने का गौरव हासिल है। 2019 के आम चुनाव में भाजपा के उपेन्द्र सिंह रावत यहां से सांसद बनकर दिल्ली पहुंचे। भाजपा की नजर इस बार जीत की हैट्रिक पर है।

पिछले दो चुनावों का हाल

17वीं लोकसभा 2019 के आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र सिंह रावत को जीत के साथ कुल 535,917 (46.37 प्रतिशत) मत मिले थे। दूसरे नंबर पर सपा के राम सागर रावत को 425,777 (36.84 प्रतिशत) मत मिले थे। वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद पी.एल पुनिया के बेटे तनुज पुनिया को 159,611 (13.8 प्रतिशत) मत से संतोष करना पड़ा था। पुनिया की जमानत जब्त हुई।

2014 में भाजपा की प्रियंका सिंह रावत ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया और जिले की पहली महिला सांसद बनी। प्रियंका को 454,214 (42.52 प्रतिशत) वोट हासिल हुए। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी पी0एल0 पुनिया के खाते में 242,336 (22.69 प्रतिशत) वोट आए। पुनिया दूसरे स्थान पर रहे। वहीं बसपा और सपा प्रत्याशी तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। दोनों अपनी जमानत बचाने में विफल रहे।

किस पार्टी ने किसको बनाया उम्मीदवार

भाजपा ने राजरानी रावत को मैदान में उतारा है। सपा-कांग्रेस गठबंधन में ये सीट कांग्रेस के खाते में है। कांग्रेस की ओर से चुनौती देने के लिए तनुज पुनिया मैदान में हैं। वहीं बसपा से शिव कुमार दोहरे ताल ठोक रहे हैं। इस सीट पर कुल 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिसमें 5 निर्दलीय हैं।

बाराबंकी सीट का जातीय समीकरण

बाराबंकी की सुरक्षित सीट पर 23 लाख 29 हजार 417 मतदाता लोकसभा चुनाव 2024 में अपना पसंदीदा सांसद चुनेंगे। जातीय समीकरण की बात करें तो, 55 फीसदी वोटरों में दलितों में करीब 12 फीसदी गौतम और 13 फीसदी रावत बिरादरी के हैं, चुनाव में इनका बंटवारा तय है। इसके साथ ही अन्य पिछड़ी कई जातियों में 12 प्रतिशत यादव और 13 फीसदी कुर्मी और करीब 18 फीसदी मुस्लिम वोटर शामिल हैं।

विधानसभा सीटों का हाल

बाराबंकी (अ0जा0) संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें कुर्सी, जैदपुर (अ0जा0), रामनगर, हैदरगढ़ (अ0जा0) और बाराबंकी सदर सीटें आती हैं। कुर्सी और हैदरगढ़ सीटों पर भाजपा का कब्जा है। बाकी सीटों पर सपा काबिज है।

जीत का गणित और चुनौतियां

बाराबंकी जिले में पिछड़े वर्ग की राजनीति करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का प्रभाव रहता था। लेकिन उनके न रहने पर इनके बेटे पूर्व मंत्री राकेश वर्मा और सपा के कद्दावर नेता अरविंद सिंह गोप का दबदबा है। सपा-कांग्रेस गठबंधन का फायदा इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को मिलेगा। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना विपक्षी पार्टियों में गुटबाजी और क्षेत्र में मजबूती न होने से नुकसान उठाना पड़ेगा। बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी पर बाहरी होने का आरोप भी विपक्ष लगा रहा है। अवध क्षेत्र की इस संसदीय सीट पर राम मंदिर और डबल इंजन की सरकार के विकास कार्यों की गूंज साफ सुनाई देती है।

स्थानीय पत्रकार काशीनाथ दीक्षित के अनुसार, बदलते चुनावी समीकरण में सपा और कांग्रेस ने अपने आप इंडिया गठबंधन के तले मजबूत दिखाने का दावा किया है। भाजपा के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग,दलित, सामान्य वर्ग के मतदाताओं के साथ पसमांदा मुस्लिम भी भाजपा से जुड़ा हुआ है। इसी वजह के साथ भाजपा लागतार तीसरी बार इस सीट पर कब्जा कर सकती है।

बाराबंकी से कौन कब बना सांसद

1952 मोहन लाल सक्सेना (कांग्रेस)

1957 स्वामी रामानंद (कांग्रेस)

1962 राम सेवक यादव (सोशलिस्ट)

1967 आर एस यादव (संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी)

1971 कुंवर रुद्र प्रताप सिंह (कांग्रेस)

1977 राम किंकर (भारतीय लोकदल)

1980 राम किंकर (जनता पार्टी सेक्यूलर)

1984 कमला प्रसाद (कांग्रेस)

1989 राम सागर (जनता दल)

1991 राम सागर (जनता पार्टी)

1996 राम सागर (सपा)

1998 बैजनाथ रावत (भाजपा)

1999 राम सागर (सपा)

2004 कमला प्रसाद (बसपा)

2009 पी0एल0 पुनिया (कांग्रेस)

2014 प्रियंका सिंह रावत (भाजपा)

2019 उपेंद्र सिंह रावत (भाजपा)

हिन्दुस्थान समाचार/ डॉ.आशीष वशिष्ठ/राजेश

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