लोस चुनाव : बाराबंकी में सबसे बड़ी जीत प्रियंका और सबसे छोटी रामसेवक की

लोस चुनाव : बाराबंकी में सबसे बड़ी जीत प्रियंका और सबसे छोटी रामसेवक की
लोस चुनाव : बाराबंकी में सबसे बड़ी जीत प्रियंका और सबसे छोटी रामसेवक की


लखनऊ, 16 मई (हि.स.)। राजधानी लखनऊ से सटी बाराबंकी सुरक्षित सीट प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखती है। इस सीट पर अब तक हुए 17 चुनाव में किसी एक दल का दबदबा नहीं रहा। बात अगर जीत हार की कि जाए तो यहां सबसे छोटी जीत सोशलिस्ट पार्टी के राम सेवक यादव के नाम दर्ज है। राम सेवक ने 0.14 फीसदी के अंतर से जीत का परचमल फहराया था। उल्लेखनीय है कि इस सीट पर अब तक सबसे बड़ी जीत भाजपा की प्रिंयका सिंह रावत के नाम है।

321 वोट से जीते थे राम सेवक यादव

तीसरी लोकसभा के 1967 में हुए चुनाव में बाराबंकी सुरक्षित सीट से पांच प्रत्याशी मैदान में थे। खास बात यह रही कि इसमें एक भी निर्दलीय शामिल नहीं था। सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राम सेवक यादव ने इस चुनाव में जीत दर्ज कर कांग्रेस की गाड़ी पर ब्रेक लगाई थी। राम सेवक यादव ने कांग्रेस का वर्चस्व तोड़ते हुए कांटे के मुकाबले में मात्र 321 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी। राम सेवक यादव को 76,545 (34.25 प्रतिशत) वोट हासिल हुए। वहीं दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी हुसैन कामिल किदवई को 76,224 (34.11 प्रतिशत) वोट मिले। जीत हार का अंतर 0.14 फीसदी यानी 321 वोट का रहा। जनसंघ के प्रत्याशी कृष्ण दास को 17.27 फीसदी, स्वतंत्र पार्टी के कृष्ण बिहारी 8.49 फीसदी और सीपीआई के औतार एम0 5.88 फीसदी वोट मिले। इस चुनाव में 2 लाख 23 हजार 476 वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

2 लाख से ज्यादा वोटों से जीती प्रियंका रावत

बाराबंकी संसदीय सीट के इतिहास में जहां सबसे छोटी जीत राम सेवक यादव के खाते में दर्ज है तो वहीं सबसे बड़ी जीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नाम अंकित है। 2014 में भाजपा की प्रियंका सिंह रावत ने जीत दर्ज कर जिले की पहली महिला सांसद बनने का गौरव हासिल किया। प्रियंका को 454,214 (42.52 प्रतिशत) वोट हासिल हुए। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी पी0एल0 पुनिया के खाते में 242,336 (22.69 प्रतिशत) वोट आए। पुनिया दूसरे स्थान पर रहे। वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रत्याशी कमला प्रसाद रावत को 167,150 (15.65 प्रतिशत) और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रत्याशी राजरानी रावत को 15924 (14.91प्रतिशत) वोट मिले। सपा और बसपा प्रत्याशी अपनी जमानत जब्त होने से बचाने में विफल रहे। इस चुनाव में कुल 14 प्रत्याशी मैदान में थे, इसमें 3 निर्दलीय थे। 10 लाख 68 हजार 168 मतदाताओं ने इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

हिन्दुस्थान समाचार/ डॉ. आशीष वशिष्ठ/राजेश

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