भाजपा गांव की सच्चाई का सामना नहीं करना चाहती, इसलिए टाल रही पंचायत चुनाव : सुनील सिंह
लखनऊ, 29 अप्रैल (हि.स.)। लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को जानबूझकर विलंब से कराने के पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने बुधवार को मॉल एवेन्यू स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस आयाेजित कर कहा कि पंचायत चुनाव में यह देरी केवल प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
सुनील सिंह ने आगे कहा कि उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुंबई में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में 3 साल से अधिक समय तक चुनाव नहीं कराए गए और हर साल 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट अफसरों के जरिए खर्च किया गया, जहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को पूरी तरह बाहर रखा गया। जब इतनी बड़ी राशि बिना जवाबदेही के खर्च होती है तो भ्रष्टाचार बढ़ता है और जनता को उसका हिसाब नहीं मिलता। अब वही मॉडल उत्तर प्रदेश में लागू करने की कोशिश हो रही है—पंचायत चुनाव टालो, प्रशासन बैठाओ और हजारों करोड़ रुपये के बजट पर सीधा नियंत्रण रखो। गांव की चुनी हुई सरकार को खत्म कर अफसरशाही के भरोसे व्यवस्था चलाना लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा हमला है। जब जनता का प्रतिनिधि नहीं होगा, तो जवाबदेही भी नहीं होगी और फैसले बंद कमरों में लिए जाएंगे।
उन्हाेंने कहा कि वर्तमान सरकार की रणनीति है—चुनाव टालो, समय खरीदो और जनभावना को दबाओ। लेकिन लोकतंत्र में सत्ता जनता से मिलती है, अफसरों से नहीं। पंचायतवस्था का उद्देश्य ही है कि गांव की आवाज सीधे शासन तक पहुंचे, लेकिन आज उसी व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। क्या सरकार जनता के बीच जाएगी या अफसरों के पीछे छिपेगी? लोकदल की मांग है कि पंचायत चुनाव तुरंत घोषित किए जाएं और गांव की सत्ता जनता को वापस दी जाए।
सुनील सिंह ने आरोप लगाया है, पंचायतें लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई होती हैं और समय पर चुनाव न कराना सीधे-सीधे जनता के अधिकारों का हनन है। चुनावों में देरी के चलते गांवों में विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अभाव में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह हावी हो गया है, जिससे आम जनता की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर प्रशासनिक बहानों जैसे परिसीमन, आरक्षण या अन्य प्रक्रियाओं का सहारा लेकर चुनाव टाल रही है, जबकि इन प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा किया जा सकता था।
इसके साथ ही उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत चुनावों को टालने का एक बड़ा कारण यह भी है कि सरकार पंचायतों के लिए आवंटित बजट को प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से अपने मनमाने तरीके से खर्च कर रही है। बिना जनप्रतिनिधियों की निगरानी के यह धनराशि पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव में उपयोग की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ रही हैं और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि समय पर पंचायत चुनाव कराए जाते, तो जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि इस बजट के उपयोग पर निगरानी रखते और विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाते। लेकिन वर्तमान स्थिति में जनता का पैसा जनता की प्राथमिकताओं के बजाय सरकार की राजनीतिक रणनीतियों के तहत खर्च किया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। सुनील सिंह ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जल्द से जल्द पंचायत चुनाव की घोषणा नहीं करती है, तो लोकदल प्रदेशभर में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

