सांसद राजीव राय की शिकायत पर लोकसभा विशेषाधिकार समिति सख्त, आराेपित पांच अगस्त काे तलब
मऊ के तत्कालीन एसपी, एसएचओ और ईएनटी सर्जन 5 अगस्त को होंगे तलब
मऊ, 31 जुलाई (हि.स.)। सांसद राजीव राय द्वारा लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष दर्ज कराई गई विशेषाधिकार हनन की शिकायत पर संसदीय स्तर पर महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई है। लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए मऊ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (वर्तमान में एसएसपी, एटा) इलामरन, सरायलखंसी के तत्कालीन थाना प्रभारी राज कुमार सिंह तथा जिला अस्पताल, मऊ के ईएनटी सर्जन डॉ. सौरभ त्रिपाठी को व्यक्तिगत रूप से समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है।
लोकसभा सचिवालय द्वारा 23 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, तीनों अधिकारियों को 5 अगस्त 2026, बुधवार को अपराह्न 3:00 बजे नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी एक्सटेंशन, समिति कक्ष संख्या-2 में उपस्थित होकर मामले में मौखिक साक्ष्य (Oral Evidence) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सांसद राजीव राय ने 22 अक्टूबर 2024 को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष नोटिस देकर आरोप लगाया था कि उनके विरुद्ध बिना किसी वैधानिक आधार के एफआईआर दर्ज कराई गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि संबंधित अधिकारियों ने उनके साथ पक्षपातपूर्ण, अपमानजनक और एक निर्वाचित सांसद की संसदीय गरिमा के प्रतिकूल व्यवहार किया, जिससे उनके संसदीय विशेषाधिकारों का गंभीर हनन हुआ।
सांसद ने इस पूरे प्रकरण में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध संसदीय कार्रवाई की मांग की थी।
लिखित जवाब से संतुष्ट नहीं हुई समिति
शिकायत मिलने के बाद विशेषाधिकार समिति ने संबंधित अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। अधिकारियों ने अपना जवाब समिति के समक्ष प्रस्तुत भी किया, लेकिन समिति उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई। मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए समिति ने निर्णय लिया कि केवल लिखित जवाब पर्याप्त नहीं है और संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक है।
इसी के तहत तीनों अधिकारियों को समिति के समक्ष उपस्थित होकर मौखिक साक्ष्य देने तथा सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
गृह मंत्रालय को भी दिए गए निर्देश
लोकसभा सचिवालय ने इस मामले में भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भी पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों की निर्धारित तिथि एवं समय पर समिति के समक्ष उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। साथ ही 31 जुलाई 2026 तक अधिकारियों की उपस्थिति की पुष्टि लोकसभा सचिवालय को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है।
इस कार्यालय ज्ञापन की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), संबंधित अधिकारियों तथा सांसद राजीव राय को भी भेजी गई है।
संसदीय कार्रवाई पर रहेगी नजर
लोकसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा अधिकारियों के लिखित स्पष्टीकरण को स्वीकार न करते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाना इस मामले को गंभीरता से लिए जाने का संकेत माना जा रहा है। अब 5 अगस्त को होने वाली सुनवाई में अधिकारियों के मौखिक साक्ष्य और समिति के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आगे की संसदीय कार्रवाई तय होगी। इस सुनवाई के बाद समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया संचालित होगी। यह जानकारी शुक्रवार काे सांसद प्रतिनिधि ने दी।
हिन्दुस्थान समाचार / वेद नारायण मिश्र

