साहित्य समाज को जागरूक करने का सबसे प्रभावी माध्यम : डॉ राधेश्याम मिश्रा

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साहित्य समाज को जागरूक करने का सबसे प्रभावी माध्यम : डॉ राधेश्याम मिश्रा


कानपुर, 03 मई (हि.स.)। साहित्य समाज का दर्पण है और यह लोगों को जागरूक करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। कवि और लेखक अपने शब्दों से समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। आज के समय में साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और सामाजिक चेतना मजबूत होती है। साहित्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। यह बातें रविवार को कवि डॉ राधेश्याम मिश्रा ने कहीं।

मानव कल्याण महिला समिति द्वारा खलासी लाइन स्थित सभागार में एक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर महेश प्रसाद गुप्त, ओम प्रकाश अग्रवाल, अरविन्द पिलानिया और प्रेम नारायण सोमानी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजकों ने समिति की गतिविधियों और उद्देश्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान साहित्य के विभिन्न आयामों—कविता, कहानी और लेखन—पर चर्चा की गई और बताया गया कि किस प्रकार साहित्य समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में साहित्य की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। साहित्य न केवल समाज की समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि उनके समाधान की दिशा भी दिखाता है। इस दौरान युवाओं को साहित्य से जोड़ने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम में काव्य पाठ और विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें विभिन्न कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। काव्य पाठ के दौरान सामाजिक सरोकारों, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी रचनाओं ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। श्रोताओं ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं।

इस दौरान सुन तिवारी और ऋषि कुमार शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्य की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है और इसके जरिए लोगों में जागरूकता लाई जा सकती है।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों और प्रतिभागियों को शॉल, माला और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने की बात कही।

इस दौरान कुलदीप गुप्ता, अजय सिंह, संजय त्रिपाठी, राजेश अवस्थी, विनोद शुक्ला, मनोज तिवारी, दीपक मिश्रा और आलोक वर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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