ग्रन्थ ईश्वर और धर्म का लोकार्पण

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ग्रन्थ ईश्वर और धर्म का लोकार्पण


गोरखपुर, 12 अप्रैल (हि.स.)। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब, गोरखपुर में पूर्वांचल हिन्दी मंच के तत्त्वावधान में डॉ. उषा द्विवेदी की सद्य: प्रकाशित आलोचनात्मक शोधकृति 'छायावादोत्तर हिन्दी कविता में ईश्वर और धर्म' नामक ग्रन्थ का लोकार्पण विद्वान साहित्यकारों द्वारा किया गया। प्रथमत: ग्रन्थ- लेखिका डॉ. ऊषा द्विवेदी द्वारा आत्मवक्तव्य दिया गया।

मुख्य अतिथि प्रो. अनंत मिश्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय परिवेश कभी भी ईश्वर और धर्म की चिन्ता से विमुक्त नहीं हुआ। मनुष्यता मात्र चाहे वह आस्तिक हो किं वा नास्तिक, धर्म और ईश्वर से टकराने से वंचित कभी नहीं हुई। मुख्य वक्ता प्रो. रामदरश राय ने कहा कि आत्मा-परमात्मा के अद्वैत और अस्तित्व को 'नैशां तर्केण...' या कि 'नेति-नेति' कहकर ईश्वरीय खोज की यात्रा को विराम-विश्राम दिया जाता रहा है। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. उमाकान्त राय ने ग्रन्थ-लेखिका के ईश्वर और धर्म विषयक विमर्श को आज के वैज्ञानिक युग में प्रासंगिक ठहराया।

डॉ. फूलचन्दप्रसाद गुप्त, डॉ. आर. के. राय, डॉ. शाकिर अली खां, आज के सम्पादक श्री अखिलेख चन्द, डॉ. विनयमोहन त्रिपाठी, डॉ. अजय अनजान, डॉ. अभिताभ पाण्डेय, डॉ. अंगदकुमार सिंह ने कृति और कृतिकार को शुभकामना और बधाई दी । डॉ. संजयन त्रिपाठी और डॉ. अजय अनजान ने स्वागत वक्तव्य दिया। डॉ. अंगदकुमार सिंह ने आभार ज्ञापन किया। संचालन का गम्भीर दायित्व निभाया डॉ. अमिताभ पाण्डेय ने। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर ग्रन्थ के अक्षर संयोजक महेशनारायण त्रिगुणायत, प्रकाशक सौरभ सिंह एवं लेखिका की सासू मां श्रीमती पुष्पा देवी को सम्मानित किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय

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