कुशीनगर : नारायणी नदी के तट पर रविवार काे गूंजेगी रॉकेट की गर्जना, कैनसैट की होगी लॉन्चिंग

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कुशीनगर : नारायणी नदी के तट पर रविवार काे गूंजेगी रॉकेट की गर्जना, कैनसैट की होगी लॉन्चिंग


कुशीनगर : नारायणी नदी के तट पर रविवार काे गूंजेगी रॉकेट की गर्जना, कैनसैट की होगी लॉन्चिंग


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कुशीनगर : नारायणी नदी के तट पर रविवार काे गूंजेगी रॉकेट की गर्जना, कैनसैट की होगी लॉन्चिंग


-इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप में देशभर के युवा वैज्ञानिक दिखाएंगे प्रतिभा, अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका होंगे शामिल

कुशीनगर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा को नई उड़ान देने के उद्देश्य से रविवार को कुशीनगर जिले के पिपराघाट जंगली पट्टी में नारायणी नदी के तट पर इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 के तहत कैनसैट लॉन्चिंग कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ होगा। इस आयोजन में देशभर से पहुंचे युवा वैज्ञानिक अपने तकनीकी कौशल और वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष एवं देश के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. पवन गोयनका भी शामिल होंगे। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से ग्रामीण परिवेश में भी अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों और संस्थानों से आए विद्यार्थियों ने अपने-अपने कैनसैट तैयार किए हैं। कैनसैट छोटे उपग्रह जैसे उपकरण होते हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थी अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी तकनीकों को समझने और उनका व्यावहारिक परीक्षण करने का अवसर प्राप्त करते हैं। इन उपकरणों में सेंसर, डेटा संग्रहण और संचार जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। लॉन्चिंग के दौरान विद्यार्थी अपने तैयार किए गए कैनसैट की कार्यप्रणाली को वास्तविक परिस्थितियों में परखेंगे। इससे उन्हें किताबों में पढ़े गए वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रयोग के माध्यम से समझने का मौका मिलेगा।

इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट निर्माण और उपग्रह तकनीक से जोड़ना है। इसके साथ ही उनमें अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी दक्षता और प्रयोगधर्मिता की भावना विकसित करना भी आयोजन का प्रमुख लक्ष्य है। वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता से युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। विद्यार्थियों को अपने प्रयोगों की सफलता और चुनौतियों को समझने के साथ ही विशेषज्ञों से सीखने का अवसर भी मिलेगा।

आयोजन के माध्यम से अंतरिक्ष तकनीक को केवल बड़े शहरों और वैज्ञानिक संस्थानों तक सीमित न रखकर गांवों और किसानों के विकास से जोड़ने की दिशा में भी पहल की जा रही है। उपग्रह तकनीक का इस्तेमाल मौसम की जानकारी, कृषि, संचार और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में विद्यार्थियों को इन तकनीकों से परिचित कराना भविष्य के वैज्ञानिकों और नवाचारकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 की तैयारियों के बीच देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने आयोजन से जुड़े विभिन्न स्थलों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने लॉन्च पैड, द प्रेसिडेंट स्कूल और जगदीश पब्लिक स्कूल सहित अन्य स्थानों पर पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं, तकनीकी तैयारियों और प्रतिभागियों के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली।

सांसद ने प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे युवा वैज्ञानिकों से बातचीत कर उनके द्वारा तैयार किए गए कैनसैट और तकनीकी मॉडलों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने उन्हें अपने प्रयोगों की विशेषताओं और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में बताया। सांसद ने युवाओं की वैज्ञानिक सोच और नवाचार के प्रति रुचि की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ ही देश की वैज्ञानिक प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने आयोजन से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिकों से भी मुलाकात कर तैयारियों पर चर्चा की। सांसद ने विभिन्न स्थलों पर चल रही व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आयोजन को सफल बनाने के लिए आवश्यक प्रयासों की जानकारी ली। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों की भागीदारी इस प्रतियोगिता को विशेष बना रही है।

नारायणी नदी के तट पर होने वाला यह आयोजन क्षेत्र के लिए भी खास महत्व रखता है। इससे कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों में विज्ञान एवं तकनीक के प्रति नई रुचि पैदा होने की उम्मीद है। रविवार को होने वाली कैनसैट लॉन्चिंग के माध्यम से युवा वैज्ञानिक अपने ज्ञान और तकनीकी क्षमता को जमीन पर उतारेंगे। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए सीखने, प्रयोग करने और भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

Livevns.news Desk
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