कुशीनगर : नारायणी तट पर दूसरे दिन 20 कैनसैट और सात मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण

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कुशीनगर : नारायणी तट पर दूसरे दिन 20 कैनसैट और सात मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण


कुशीनगर : नारायणी तट पर दूसरे दिन 20 कैनसैट और सात मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण


कुशीनगर : नारायणी तट पर दूसरे दिन 20 कैनसैट और सात मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण


कुशीनगर : नारायणी तट पर दूसरे दिन 20 कैनसैट और सात मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण


कुशीनगर : नारायणी तट पर दूसरे दिन 20 कैनसैट और सात मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण


- दो दिनों में 39 कैनसैट और आठ मॉडल रॉकेट लॉन्च, 27 छात्र टीमों ने दिखाया तकनीकी कौशल

-खेत में मिला खोया कैनसैट, किसानों ने सुरक्षित टीम को लौटाया

- रॉकेट की उड़ान देखकर उत्साहित हुए स्कूली बच्चे, बोले- बड़े होकर हम भी लेंगे हिस्सा

कुशीनगर, 02 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के नारायणी नदी के तट पर आयोजित इन-स्पेस कैनसैट और मॉडल रॉकेट्री इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन-2026 में सोमवार को दूसरे दिन भी अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक का रोमांच देखने को मिला। दूसरे दिन 20 कैनसैट और सात मॉडल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया गया। इसके साथ ही दो दिनों में लॉन्च किए गए कैनसैट की संख्या 39 और मॉडल रॉकेट की संख्या आठ पहुंच गई। दूसरे दिन की गतिविधियों में 27 छात्र टीमों ने हिस्सा लेकर अपनी तकनीकी क्षमता और वैज्ञानिक सोच का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी अपने तैयार किए गए मॉडल और प्रयोगों के साथ पहुंचे हैं।

लॉन्चिंग के दौरान विद्यार्थियों ने अपने डिजाइन और तकनीकी प्रणालियों के जरिए अंतरिक्ष से जुड़े प्रयोगों को धरातल पर उतारने का प्रयास किया। प्रक्षेपण के बाद टीमें अपने कैनसैट से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करने में जुट गईं। इन आंकड़ों के माध्यम से विद्यार्थी अपने उपकरणों के प्रदर्शन, तकनीकी क्षमता और डिजाइन की खूबियों व कमियों का आकलन कर रहे हैं। प्रतियोगिता के अंतिम दिन मंगलवार को टीमों के प्रदर्शन और तकनीकी उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जाएगा।

इन-स्पेस के निदेशक (प्रमोशन निदेशालय) डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों का उत्साह और तकनीकी प्रतिबद्धता अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की युवा प्रतिभाओं की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई जाने वाली वैज्ञानिक अवधारणाओं को वास्तविक परिस्थितियों में समझने और प्रयोग करने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के अंतिम दिन टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। विद्यार्थी अपने तकनीकी कौशल, नवाचार और नए विचारों को प्रस्तुत करेंगे। इस तरह के आयोजन देश के भावी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रतियोगिता का समापन मंगलवार, तीन नवंबर को होगा। इसके जरिए विद्यार्थियों को अंतरिक्ष तकनीक, नवाचार और प्रयोग आधारित शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन में विद्यार्थियों के साथ स्थानीय स्कूलों के बच्चों को भी प्रक्षेपण गतिविधियों को देखने और अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।

प्रमुख तकनीकी संस्थानों की टीमों ने लिया हिस्सा

प्रतियोगिता में देश के कई प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की टीमें शामिल हुई हैं। कैनसैट श्रेणी में आईआईटी मुंबई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी), नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसयूटी), लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। वहीं मॉडल रॉकेट्री श्रेणी में आईआईटी पलक्कड़, दयानंद सागर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट), दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, बिट्स पिलानी और आईआईएसटी की टीमों ने अपने मॉडल रॉकेट लॉन्च किए।

खेत में मिला खोया कैनसैट, किसानों ने झोले में रखकर लौटाया

प्रतियोगिता के दौरान तकनीकी गतिविधियों के साथ एक ऐसा घटनाक्रम भी सामने आया, जिसने प्रतिभागी टीमों को राहत और स्थानीय किसानों के प्रति सम्मान से भर दिया। खेत में काम करने गए दो किसानों को एक कैनसैट मिला। उन्होंने उपकरण को सुरक्षित उठाया और आयोजन स्थल पर पहुंचकर संबंधित टीम को सौंप दिया। किसानों की ईमानदारी से इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज, गाजियाबाद की टीम को अपने महत्वपूर्ण उपकरण के साथ मिशन से जुड़े आंकड़े भी वापस मिल गए।

दरअसल, रविवार को कैनसैट की लॉन्चिंग के बाद तीन उपकरणों को खोजने में सफलता नहीं मिली थी। इनमें इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज की टीम का कैनसैट भी शामिल था। सोमवार को किसान हरिलाल निषाद और लक्ष्मण निषाद अपने खेत देखने गए थे। इसी दौरान उनकी नजर खेत में पड़े एक उपकरण पर पड़ी। उपकरण को देखकर उन्हें अंदाजा हो गया कि यह रॉकेट्री प्रतियोगिता में आए किसी प्रतिभागी दल का हो सकता है।

दोनों किसानों ने कैनसैट को उठाकर सुरक्षित अपने घर पहुंचाया। इसके बाद उसे झोले में रखकर सीधे आयोजन स्थल के आब्जर्वेशन एरिया में पहुंचे। वहां जैसे ही उन्होंने उपकरण दिखाया, इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज की टीम के सदस्यों ने उसे पहचान लिया। अपना खोया हुआ कैनसैट वापस मिलने पर टीम के सदस्यों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

टीम लीडर शुभम पांडेय ने बताया कि यह कैनसैट उनके मिशन के लिए काफी महत्वपूर्ण था। इसकी लॉन्चिंग और लैंडिंग की प्रक्रिया सफल रही थी, लेकिन बाद में इसे रिकवर नहीं किया जा सका था। उन्होंने बताया कि उपकरण में मिशन से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा मौजूद है और कैनसैट अभी भी काम कर रहा है। इसके वापस मिलने से टीम को प्रयोग के दौरान जुटाए गए जरूरी आंकड़े सुरक्षित प्राप्त हो गए हैं।

रॉकेट की उड़ान देखकर उत्साहित हुए स्कूली बच्चे

नारायणी नदी के तट पर हो रही रॉकेट लॉन्चिंग स्कूली बच्चों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी रही। सोमवार को कुशीनगर और देवरिया के चार स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने आयोजन स्थल का भ्रमण किया। किताबों और तस्वीरों में रॉकेट तथा उपग्रहों के बारे में पढ़ने वाले बच्चों को पहली बार इन्हें करीब से देखने और इनके प्रक्षेपण की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला। रॉकेट की उड़ान देखते ही बच्चों में उत्साह देखने को मिला। कई विद्यार्थियों ने भविष्य में ऐसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की इच्छा जताई।

भ्रमण करने वाले विद्यालयों में जगदीश पब्लिक स्कूल, गौरी श्रीराम और स्टार पब्लिक स्कूल, परसा उर्फ सिरिसिया (कुशीनगर) के अलावा गुरुकुल मिशन स्कूल और सनबीम स्कूल (देवरिया) के विद्यार्थी शामिल रहे। अलग-अलग कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने आयोजन स्थल पर कैनसैट और मॉडल रॉकेट की लॉन्चिंग देखी। उन्होंने वहां मौजूद विशेषज्ञों और प्रतिभागियों से उपकरणों के निर्माण, तकनीक, उनके काम करने के तरीके और प्रक्षेपण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।

जगदीश पब्लिक स्कूल के छात्र अनुज कुमार, आयुष राय, मनीष मिश्रा और ऋतिक कुमार ने बताया कि उनके लिए यह बिल्कुल नया अनुभव रहा। अब तक उन्होंने रॉकेट और उपग्रहों के बारे में किताबों तथा तस्वीरों में ही देखा और पढ़ा था। यहां आकर उन्हें इन उपकरणों को करीब से समझने और उनकी उड़ान देखने का मौका मिला। विद्यार्थियों ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें काफी प्रेरणा मिली है। बड़े होकर वे भी रॉकेट और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना चाहते हैं।

देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक और विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छोटे शहरों और जिलों के विद्यार्थियों को भी ऐसे अवसर मिलने चाहिए, जहां वे अपनी आंखों से तकनीक को काम करते देख सकें और उससे सीख सकें। कुशीनगर में आयोजित यह प्रतियोगिता स्थानीय बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाओं से जोड़ने का माध्यम बन सकती है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के भीतर जिज्ञासा पैदा करते हैं। जब विद्यार्थी किसी वैज्ञानिक प्रयोग को अपनी आंखों के सामने होते देखते हैं तो उनके मन में उससे जुड़े सवाल पैदा होते हैं। यही सवाल आगे चलकर उन्हें शोध, नवाचार और तकनीकी शिक्षा की ओर प्रेरित करते हैं।

मॉडल रॉकेट लॉन्च करने वाली सात टीमें

प्रतियोगिता के दूसरे दिन मॉडल रॉकेट लॉन्च करने वाली टीमों में आईआईटी पलक्कड़ (केरल), दयानंद सागर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (कर्नाटक), मैनिट भोपाल, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, बिट्स पिलानी हैदराबाद, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी), तिरुवनंतपुरम और एसपीसीई मुंबई शामिल रहीं। इन संस्थानों के विद्यार्थियों ने अपने तैयार मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण कर तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।

कैनसैट लॉन्च करने वाली 20 संस्थानों की टीमें

कैनसैट श्रेणी में आईआईटी मुंबई, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, दयानंद सागर एकेडमी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, महात्मा गांधी मिशन, एसटीईएस सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट्स, भारत इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, केएलएस गोगटे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, केसीजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, जीएसएसएस इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी फॉर विमेन, जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, द्वारकादास जीवनलाल संघवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, जेएसएस यूनिवर्सिटी, श्री साईराम इंजीनियरिंग कॉलेज, राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज, केआईपीएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, वीर सुरेंद्र साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जैन डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी, सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी और आईआईएसटी की टीमें शामिल रहीं।

इस तरह नारायणी नदी के तट पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में देशभर के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। एक ओर जहां तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों ने अपने प्रयोगों के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान की संभावनाएं प्रस्तुत कीं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्कूली बच्चों को इन गतिविधियों से जुड़कर विज्ञान की दुनिया को करीब से जानने का अवसर मिला। मंगलवार को प्रतियोगिता के समापन के साथ दो दिनों से जारी प्रक्षेपण और तकनीकी गतिविधियों का सिलसिला पूरा होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक

Livevns.news Desk
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