प्रयागराज-कानपुर खंड पर की जा रही स्वदेशी ‘कवच’ प्रणाली स्थापित

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प्रयागराज-कानपुर खंड पर की जा रही स्वदेशी ‘कवच’ प्रणाली स्थापित


प्रयागराज, 17 मार्च (हि.स)। रेल संरक्षा को सुदृढ़ करने और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, उत्तर मध्य रेलवे आगामी सप्ताह के भीतर प्रयागराज और कानपुर (दोनों स्टेशन छोड़ कर) के बीच 190 रूट किलोमीटर के खंड पर स्वदेशी रूप से विकसित ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली चालू करने जा रही है। जो आधुनिकीकरण में एक मील का पत्थर साबित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को समाप्त करना और इस व्यस्त रेल खंड पर परिचालन दक्षता को बढ़ाना है।

यह जानकारी वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी अमित मालवीय ने मंगलवार को देते हुए बताया कि इस प्रणाली को चालू करने का निर्णय व्यापक तकनीकी और फील्ड परीक्षणों के बाद लिया गया है। जिसमें सिस्टम की पूर्ण विश्वसनीयता सुनिश्चित की गई है। परीक्षण चरण के दौरान 8, 16 और 22 एलएचबी कोच वाले डब्लूएपी 7 लोकोमोटिव के साथ विभिन्न कम्पोजीशन वाले रेकों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त, उच्च गति पर प्रदर्शन को परखने के लिए 20-कोच वाली वंदे भारत रेक का भी गहन परीक्षण किया गया। इस प्रणाली का यात्री संरक्षा के दृष्टिकोण से, चौरी चौरा एक्सप्रेस (ट्रेन 15003-15004) सहित विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से 20,000 किलोमीटर से अधिक का पैसेंजर ट्रायल पूरा किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि ‘कवच’ एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा कवच है जो रेल संचालन में संरक्षा की कई परतें जोड़ता है। यह प्रणाली मुख्य रूप से ‘सिग्नल पासिंग एट डेंजर’ रोकने के लिए डिज़ाइन की गई है, जहां लोको पायलट द्वारा लाल सिग्नल की अनदेखी करने पर यह स्वतः हस्तक्षेप करती है। इसके अलावा, यदि लोको पायलट निर्धारित गति सीमा को नियंत्रित करने में विफल रहता है या आमने-सामने की टक्कर की स्थिति बनती है, तो यह प्रणाली स्वचालित रूप से आपातकालीन ब्रेक लगा देती है। यह लोकोमोटिव की गति और आवश्यक ब्रेकिंग दूरी की रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करती है।

पीआरओ ने बताया कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व और प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर सत्येंद्र कुमार के तकनीकी मार्गदर्शन में प्राप्त की गई है। सत्येंद्र कुमार ने स्वयं लोकोमोटिव परीक्षणों की निगरानी की ताकि सुरक्षा के सभी मानकों की पुष्टि की जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तर मध्य रेलवे आधुनिक संरक्षा तकनीकों को अपनाने और भारतीय रेलवे के संरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, ताकि यात्रियों के लिए ट्रेनों का संचालन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल बनाया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र

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