“कश्मीर किसी के अब्बा की जागीर नहीं होने वाली...” कविता सुना कर डा. हरि ओम पवार ने कवि सम्मेलन को यादगार बना दिया
लखनऊ। “अब खंडित भारत मां की तस्वीर नहीं होने वाली, कश्मीर किसी के अब्बा की जागीर नहीं होने वाली” कविता के छंद सुनाकर वीर रस के ओजस्वी हस्ताक्षर डॉ. हरि ओम पवार ने “एक शाम यूपी के नाम” कवि सम्मेलन के श्रोताओं में राष्ट्रवाद की भावना संचार की। कवि सम्मेलन का आयोजन ‘फ्रेंड्स ऑफ उत्तर प्रदेश’ की ओर से राजधानी लखनऊ के विश्वेश्वरैया सभागार में किया गया। कवि सम्मेलन में समकालीन हिंदी कवियों के अपने प्रभावशाली काव्य-पाठ ने श्रोताओं के मन में देश के सांस्कृतिक गौरव के पुनरोत्थान और राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार किया।

कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए वीर रस के प्रख्यात कवि डॉ. हरि ओम पवार ने अपने कविता पाठ से श्रोताओं में राष्ट्रवाद के ओज का संचार किया। उन्होंने अपनी कविता की पंक्तियाँ “भारत ने अब हर समझौते का आदी बनना छोड़ दिया, हर मसले में हमने नेहरू-गांधी बनना छोड़ दिया...” सुना कर देश की बदलती तस्वीर पेश की। साथ ही उन्होंने मंच से “सोई रावलपिंडी जब खामोश दिखाई देती है, उसको सपनों में ब्रह्मोस दिखाई देती है...” सुना कर देश की सेना के शौर्य का गान किया।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री डॉ. सुमन दुबे ने “शारदे मां मुझे वर दे…” की सरस्वती वंदना सुना कर किया, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सृजनात्मक ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर वीर रस के कवि अभय निर्भीक ने “भारत भू का नक्शा पूरा करने की तैयारी है, 370 हटा दिया अब पीओके की बारी है...” कविता का पाठ किया। तो वहीं अम्बेडकर नगर से आए सौरभ त्रिपाठी ने “शहीद की बेटी” कविता की प्रस्तुति दी। बाराबंकी के कवि विकास बौखल ने कहा कि यूपी में बाबा की सरकार है और बाबा जी का बुलडोजर भी तैयार है...। प्रयागराज से आए कवि जितेंद्र जलज ने गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं के साथ मुख्य अतिथि डॉ. हरि ओम पवार जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवि राम किशोर तिवारी कर रहे थे, उनके विशेष आग्रह पर अशोक टाटम्बरी ने अपना वसंत गीत प्रस्तुत किया। साथ ही लोकगीत के कुछ छंद सुना कर श्रोताओं का विशेष स्नेह प्राप्त किया। कवि सम्मेलन में आई कवयित्री शशि प्रिया ने “प्रेम पूजा है तो ये बताओ, नालियों में किसके बच्चे मिल रहे हैं...” सुना कर प्रेम की यथार्थवादी तस्वीर पेश की। इसी क्रम में वरिष्ठ कवि जमुना प्रसाद उपाध्याय ने हिंदी गीत प्रस्तुत किया। तो वहीं वेदप्रकाश प्रचण्ड, सौरभ त्रिपाठी, कुमार ध्रुव ने रसपूर्ण कविताओं का पाठ कर कवि सम्मेलन को यादगार बना दिया। फ्रेंड्स ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित यह कवि सम्मेलन देश और प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।


