करवा चौथ पर सुहागिनों को मिलेगा पांच शुभ योगों का संयोग, वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना से रखेंगी व्रत
- लक्ष्मी-नारायण, त्रिग्रही, शुक्रादित्य, गौरी और परिधि योग का बन रहा विशेष संयोग
- शाम को पूजा और रात में चंद्रदर्शन के बाद पूरा होगा व्रत
लखनऊ, 28 अक्टूबर (हि.स.)। पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ सुहागिन महिलाएं गुरुवार 29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखेंगी। इस बार पर्व पर पांच शुभ योगों का संयोग धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, लक्ष्मी-नारायण, त्रिग्रही, शुक्रादित्य, गौरी और परिधि योग के प्रभाव से दिन का महत्व बढ़ेगा। मान्यता है कि इन शुभ संयोगों में विधि-विधान से पूजन करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और समृद्धि की कामना की जाती है।
पंडित एवं ज्योतिषाचार्य राम स्वरूप शर्मा ने बुधवार को हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में कहा कि करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के बीच विश्वास, समर्पण और पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण कर निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर पूजा की तैयारियों के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन करती हैं। शाम को भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना के साथ करवा माता की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा के दर्शन, अर्घ्य और पति के हाथों जल ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
वहीं पं. राम कुमार मिश्रा का कहना है कि करवा चौथ व्रत पर अबकी बार बहुत ही शुभ योग में बनने जा रहा है। करवा चौथ व्रत में शिव—पार्वती परिवार की पूजा होती है। विशेष रूप से माता पार्वती, जिन्हें गौरी के नाम भी जाना जाता है। साथ ही भगवान शिव की पूजा होती है। अबकी बार करवा चौथ पर चंद्रमा के वृषभ राशि में होने से बड़ा ही उत्तम संयोग बन रहा है। पंचाग के अनुसार, इस दिन गौरी योग बन रहा है, जबकि शुक्र के कन्या राशि होने से शुक्रादित्य योग का भी संयोग बना है। शुक्र जिन्हें प्रेम का कारक ग्रह माना गया है, उनके शुभ स्थिति में होने से और गौरी योग के प्रभाव से अबकी बार करवा चौथ वृषभ, कन्या, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के लिए शुभ एवं लाभदायक रहेगा।
पांच योगों का धार्मिक महत्व
ज्योतिषाचार्य पं. राम स्वरूप शर्मा बताते हैं कि पंचांग में बनने वाले शुभ योगों को परंपरागत रूप से मांगलिक कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लक्ष्मी-नारायण योग को धन-वैभव और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। त्रिग्रही योग में तीन ग्रहों की विशेष स्थिति का महत्व रहता है, जबकि शुक्रादित्य योग को आकर्षण, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाओं से संबंधित माना जाता है। गौरी योग का संबंध पार्वती पूजन और दांपत्य सौभाग्य की कामना से है। वहीं, परिधि योग को भी इस दिन के ज्योतिषीय संयोगों में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि करवा चौथ का मूल भाव केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में परस्पर सम्मान, विश्वास और जिम्मेदारी को मजबूत करने का अवसर भी है। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत और शारीरिक क्षमता का ध्यान रखते हुए धार्मिक परंपराओं का पालन करना चाहिए।
शाम को पूजन, रात में चंद्रदर्शन
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को सुबह 01 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर रात 10 बजकर 09 मिनट तक रहने का उल्लेख है। पूजन के लिए शाम 05 बजकर 38 मिनट से 06 बजकर 50 मिनट तक का समय बताया गया है। चंद्रोदय रात करीब 08 बजकर 15 मिनट पर संभावित है। हालांकि, चंद्रमा निकलने का वास्तविक समय शहर और स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार कुछ अलग हो सकता है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने क्षेत्र के पंचांग अथवा स्थानीय समय की जानकारी अवश्य देखनी चाहिए।
करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के करवे, दीपक, रोली, अक्षत, पुष्प, मिठाई और पूजन सामग्री का विशेष स्थान होता है। महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी आयु तथा दांपत्य जीवन की मंगलकामना करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं समूह में पूजन करती हैं, जिससे पर्व का सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप भी दिखाई देता है।
परिधान और शृंगार में भी दिखेगी परंपरा
पर्व के अवसर पर महिलाएं अपनी राशि और पसंद के अनुसार वस्त्रों तथा शृंगार का चयन करती हैं। मेष राशि के लिए गहरे लाल या मैरून रंग, वृषभ के लिए सफेद अथवा सिल्वर, मिथुन के लिए हरा, कर्क के लिए सफेद या क्रीम और सिंह के लिए नारंगी या सुनहरे रंग को परंपरागत सुझावों में शामिल किया जाता है। इसी तरह कन्या के लिए हरा या पेस्टल, तुला के लिए गुलाबी, वृश्चिक के लिए लाल, धनु के लिए पीला, मकर के लिए गहरा नीला, कुंभ के लिए आसमानी और मीन के लिए केसरिया या हल्का पीला रंग शुभ माना जाता है। हालांकि, रंगों का यह चयन ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है, इसे अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा

