कन्या सुमंगला योजना : अमेठी की स्नातक की 23 छात्राओं को आखिरी किश्त जारी

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कन्या सुमंगला योजना : अमेठी की स्नातक की 23 छात्राओं को आखिरी किश्त जारी


लखनऊ, 29 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कन्या सुमंगला योजना आज बेटियों के भविष्य को मजबूत बनाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है। इसी कड़ी में अमेठी जिले की 23 छात्राओं को स्नातक स्तर पर प्रवेश लेने के बाद योजना की अंतिम किश्त जारी की गई, जिससे उनके सपनों को नई दिशा और मजबूती मिली है। इन छात्राओं के लिए यह सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले जहां कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण बेटियों की पढ़ाई बीच में ही रुकवा देते थे, वहीं अब इस योजना ने उनकी सोच को बदल दिया है। आज वे बेटियां उच्च शिक्षा की ओर बढ़ते हुए अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं।

शिक्षा के हर पड़ाव पर साथ : जन्म से स्नातक तक सरकार का सहयोग

कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटियों को उनके जीवन के महत्वपूर्ण शैक्षिक चरणों पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। जन्म से लेकर स्नातक स्तर तक 6 चरणों में दी जाने वाली इस राशि को 2024-25 में इसे बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इस पहल का उद्देश्य न केवल बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना है, बल्कि परिवारों पर आर्थिक बोझ कम कर उन्हें बेटियों के उज्ज्वल भविष्य में निवेश के लिए प्रेरित करना भी है।

बदलती सोच, सशक्त होती बेटियां

अमेठी की इन 23 छात्राओं की सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सही समय पर सही सहायता मिलती है, तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं। अब ये छात्राएं अपने करियर को लेकर अधिक जागरूक हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहीं हैं। परिवारों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है जहां पहले बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी, वहीं अब यह सोच बदली है और बेटियों को पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए सरकार की तरफ से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

योगी सरकार की पहल से बेटियों के सपनों को मिल रहा संबल

राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार कन्या सुमंगला योजना बेटियों को सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है। कन्या सुमंगला योजना ने न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा दिया है। अमेठी की इन 23 बेटियों की कहानी यह संदेश देती है कि यदि अवसर और सहयोग मिले, तो हर बेटी अपने सपनों को साकार कर सकती है। यह योजना केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक मजबूत, शिक्षित और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन

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