बारिश में इंजन को नमी से बचाएगा कानपुर का ‘जुगाड़’, रेलवे ने पहली बार लगाया डीह्यूमिडिफायर

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बारिश में इंजन को नमी से बचाएगा कानपुर का ‘जुगाड़’, रेलवे ने पहली बार लगाया डीह्यूमिडिफायर


कानपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजनों में लगे संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नमी से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। डीह्यूमिडिफायर (हवा से नमी हटाने वाला यंत्र) की मदद से ट्रैक्शन कन्वर्टर की कार्यक्षमता बनाए रखने और नमी के कारण होने वाली खराबियों को कम करने में मदद मिलेगी। यह बातें शनिवार को उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने कानपुर लोको शेड में शुरू किए गए नए प्रयोग के संबंध में कहीं।

उत्तर मध्य रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको शेड (ईएलएस) कानपुर ने भारतीय रेलवे में पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन को नमी से सुरक्षित रखने के लिए औद्योगिक रोटरी डेसिकेंट डीह्यूमिडिफायर लगाया है। यह सिस्टम लोकोमोटिव संख्या 44061 में लगाया गया है। इसका उद्देश्य इंजन के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक हिस्से ट्रैक्शन कन्वर्टर को नमी के दुष्प्रभाव से बचाना है।

मानसून और अत्यधिक नमी वाले मौसम में इलेक्ट्रॉनिक कार्ड, कनेक्टर और धातु के संपर्कों में जंग और ऑक्सिडेशन का खतरा बढ़ जाता है। नमी के कारण धूल-मिट्टी भी उपकरणों पर जमती है, जिससे इलेक्ट्रिकल लीकेज और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्या हो सकती है। डीह्यूमिडिफायर हवा से अतिरिक्त नमी सोखकर संबंधित हिस्से के आसपास का वातावरण अपेक्षाकृत सूखा रखेगा।

रेलवे के अनुसार इससे इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों में जंग की समस्या कम होने के साथ इंसुलेशन की उम्र बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही नमी के कारण ट्रैक्शन कन्वर्टर के खराब होने और अचानक तकनीकी दिक्कत आने की संभावना भी घटेगी। इससे इंजन की बार-बार मरम्मत की जरूरत कम होने और उसकी उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।

रेलवे ने बताया कि इस तकनीक का इस्तेमाल यूरोपीय लोकोमोटिव प्लेटफॉर्म में संवेदनशील पावर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। कानपुर लोको शेड ने भारतीय मौसम और परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसका प्रयोग शुरू किया है।

लोकोमोटिव संख्या 44061 फिलहाल इस सिस्टम के साथ नियमित परिचालन में है। तीन महीने के ट्रायल के बाद इंजन के कानपुर शेड लौटने पर सिस्टम के प्रदर्शन और तकनीकी आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर मानसून और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में चलने वाले अन्य इलेक्ट्रिक इंजनों में भी इस तकनीक को लागू करने पर विचार किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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