भूजल संरक्षण में मिसाल बन रही कानपुर मेट्रो : सुशील कुमार

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भूजल संरक्षण में मिसाल बन रही कानपुर मेट्रो : सुशील कुमार


कानपुर, 22 जुलाई (हि.स.)। भूजल संरक्षण केवल पर्यावरण की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। कानपुर मेट्रो वर्षा जल संचयन और पुनर्चक्रित जल के उपयोग जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही है। यह बातें बुधवार को उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) के जनसंपर्क अधिकारी सुशील कुमार ने कहीं।

प्रदेश में मनाए जा रहे भूजल सप्ताह के तहत उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के लिए विभिन्न पहलें कर रहा है। कानपुर मेट्रो परियोजना के दोनों कॉरिडोर, डिपो और वायाडक्ट पर वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रित जल के उपयोग तथा जल की बचत के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।

यूपीएमआरसी के अनुसार कानपुर मेट्रो के दोनों कॉरिडोर, मेट्रो डिपो और 32.5 किलोमीटर लंबे वायाडक्ट को मिलाकर लगभग 24 लाख लीटर वर्षा जल संरक्षण क्षमता विकसित की जा रही है। वायाडक्ट के प्रत्येक दूसरे स्पैन से वर्षा जल को रिचार्ज पिट तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। कॉरिडोर-1 (आईआईटी से नौबस्ता) में लगभग 250 रिचार्ज पिट तैयार किए गए हैं, जिनसे वर्षा जल सीधे भूजल स्तर को बढ़ाने में सहायक होगा।

गुरुदेव चौराहा स्थित कानपुर मेट्रो डिपो जीरो डिस्चार्ज फैसिलिटी के मॉडल पर संचालित किया जा रहा है। यहां उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल को बाहर नहीं छोड़ा जाता, बल्कि उसका शोधन कर दोबारा उपयोग किया जाता है। इसके लिए डिपो में प्रतिदिन 10 हजार लीटर क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 70 हजार लीटर क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) स्थापित किया गया है। उपचारित जल का उपयोग डिपो परिसर और वायाडक्ट क्षेत्र में बागवानी सहित अन्य कार्यों में किया जा रहा है। कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) के निर्माणाधीन डिपो में भी इसी प्रकार की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 डिपो में स्थापित ऑटोमैटिक ट्रेन वॉशिंग प्लांट में मेट्रो ट्रेनों की नियमित धुलाई भी रिसाइकिल्ड वाटर से की जाती है। इससे बड़ी मात्रा में स्वच्छ जल की बचत होती है और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।

इसके अलावा कानपुर मेट्रो के सभी स्टेशनों पर लगाए गए पेयजल एवं शौचालयों के नल और अन्य जल उपकरण पारंपरिक फिटिंग्स की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत अधिक जल-कुशल हैं। इससे प्रत्येक स्टेशन पर प्रतिवर्ष लाखों लीटर पानी की बचत होने का अनुमान है। यूपीएमआरसी का कहना है कि भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग के लिए इस तरह की पहलें जारी रहेंगी।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

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