कानपुर बनेगा रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र, आईआईटी कानपुर और बीएचयू देंगे तकनीकी सहयोग : रमेश अवस्थी

WhatsApp Channel Join Now
कानपुर बनेगा रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र, आईआईटी कानपुर और बीएचयू देंगे तकनीकी सहयोग : रमेश अवस्थी


कानपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के जरिए कानपुर को हथियार और रक्षा उपकरण निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे संस्थानों के सहयोग से कॉरिडोर में विज्ञान, शोध और नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। यह बातें बुधवार को सांसद रमेश अवस्थी ने कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप में कही।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) और प्रदेश सरकार की साझेदारी में आयोजित कार्यशाला में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अगले चरण की तैयारियों और कानपुर को रक्षा उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर मंथन किया गया। चर्चा में स्पष्ट किया गया कि कॉरिडोर का विकास केवल बड़े उद्योग लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्किल डेवलपमेंट, शोध, तकनीकी नवाचार और एमएसएमई को भी इससे जोड़ा जाएगा।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन रक्षा कॉरिडोर को धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम कर रहा है। कार्यशाला में युवाओं को रक्षा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया गया। डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने कहा कि कानपुर में बुनियादी ढांचे के साथ कौशल विकास पर तेजी से काम करने की जरूरत है। आईआईटी कानपुर और बीएचयू की शोध एवं तकनीकी क्षमता का लाभ आईटीआई और स्थानीय संस्थानों तक पहुंचाने, उद्योगों के सहयोग से प्रशिक्षण और इंटर्नशिप बढ़ाने पर चर्चा हुई। इससे रक्षा उद्योगों के लिए स्थानीय स्तर पर कुशल कार्यबल तैयार किया जा सकेगा।

स्थानीय एमएसएमई के सामने आने वाली टेस्टिंग, गुणवत्ता जांच, ट्रायल और सर्टिफिकेशन जैसी चुनौतियों को आसान बनाने पर भी विचार किया गया। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पी.के. सैनी ने कहा कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं, जिससे स्थानीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ सकती है। साझा टेस्टिंग सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाकर छोटी कंपनियों को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की योजना पर चर्चा हुई।

वर्कशॉप में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी डिजाइन, बौद्धिक संपदा, सॉफ्टवेयर और उन्नत तकनीक विकसित करने की जरूरत बताई गई। कानपुर में पहले से मौजूद इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को इसका आधार बनाने पर जोर दिया गया। यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने कानपुर में निवेश को लेकर उद्योग जगत की रुचि का उल्लेख किया। टीकेएमएस इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह ने कहा कि विदेशी रक्षा कंपनियां भी भारत के बड़े बाजार में भागीदारी की संभावनाएं तलाश रही हैं।

कानपुर को रक्षा कंपनियों से जोड़कर मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) और स्पेयर पार्ट्स का केंद्र विकसित करने पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला में ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीकों के विकास पर जोर दिया गया, जिनका उपयोग रक्षा के साथ नागरिक उद्योगों में भी किया जा सके। नीति निर्माण में 'बॉटम-अप' दृष्टिकोण अपनाने और उद्यमियों की व्यावहारिक समस्याओं को नीतियों में शामिल करने की बात कही गई।

कार्यशाला के बाद झांसी में अगली कार्यशाला आयोजित होगी। वर्ष के अंत में लखनऊ में डिफेंस कॉन्क्लेव प्रस्तावित है, जहां कार्यशालाओं से सामने आए सुझावों के आधार पर प्रदेश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आगे की नीतियों पर चर्चा की जाएगी।

-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Share this story