कन्नौज: प्रभारी और समाज कल्याण मंत्री ने गिनाए वी बी जी राम जी अधिनियम के फायदे

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कन्नौज: प्रभारी और समाज कल्याण मंत्री ने गिनाए वी बी जी राम जी अधिनियम के फायदे


कन्नौज: प्रभारी और समाज कल्याण मंत्री ने गिनाए वी बी जी राम जी अधिनियम के फायदे


कन्नौज, 08 जनवरी (हि. स.)। जिले की प्रभारी मंत्री/ राज्य मंत्री उच्च शिक्षा रजनी तिवारी एवं समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने संयुक्त रूप से राही पर्यटक आवास में प्रेस संवाद के दौरान विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम, 2025 की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को केवल एक कल्याणकारी योजना न मानकर, विकास से जुड़ी कानूनी गारंटी के रूप में स्थापित करता है, जो विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है।

मंत्री ने बताया कि वी बी जीरामजी का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। यह अधिनियम पूर्ववर्ती मनरेगा की कमियों को दूर करते हुए तकनीक आधारित निगरानी, मजबूत जवाबदेही तंत्र, स्थायी संसाधनों के निर्माण तथा दीर्घकालीन ग्रामीण उत्पादन पर विशेष बल देता है।

उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मिलने वाले सुनिश्चित रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जो 25 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके अतिरिक्त कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए खेतीहर कार्यों के लिए 60 दिन का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार यह अधिनियम कुल 185 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है, जो एक निश्चित और मानक अधिकार बन गया है।

उन्होंने कहा कि अनुमन्य कार्यों की सूची को सरल और प्रभावी बनाते हुए 260 से अधिक बिखरे हुए कार्यों को अब केवल चार प्रमुख क्षेत्रों में समाहित किया गया है—जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संपत्ति निर्माण तथा जलवायु संरक्षण। इससे कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास सुनिश्चित होगा।

मंत्री ने बताया कि किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह प्रावधान किया गया है कि फसल बोने और काटने के प्रमुख मौसमों में (वर्ष में अधिकतम 60 दिन) वी बी जी रामजी के अन्य सार्वजनिक कार्यों को कानूनी रूप से रोका जाएगा, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हों। इससे एक ओर किसानों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त 60 दिनों की मजदूरी की गारंटी भी प्राप्त होगी।

मंत्री ने बताया कि बेरोजगारी भत्ता अब एक स्पष्ट और समयबद्ध कानूनी अधिकार के रूप में निर्धारित किया गया है। यदि किसी ग्रामीण परिवार को कार्य मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की समय-सीमा और जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से तय की गई है।

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली, जीपीएस एवं मोबाइल ट्रैकिंग, साप्ताहिक सार्वजनिक डेटा प्रकाशन, वर्ष में अनिवार्य दो सामाजिक अंकेक्षण तथा निरंतर निगरानी एवं सुधार हेतु केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर स्टेयरिंग कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है।

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि अब कार्य का भुगतान अनिवार्य रूप से 7 दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि किसी कारणवश भुगतान में देरी होती है, तो श्रमिकों को ब्याज सहित भुगतान किया जाएगा। इससे ग्रामीण श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक प्राप्त होगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि वी बी जीराम जी अधिनियम कार्यस्थलों की गरिमा, मजबूत गांव, टिकाऊ संसाधन और प्रभावी शासन के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव झा

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