भारतीय संचार परंपरा अत्यंत समृद्ध और प्राचीन है : डॉ. दिवाकर अवस्थी

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भारतीय संचार परंपरा अत्यंत समृद्ध और प्राचीन है : डॉ. दिवाकर अवस्थी


कानपुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। पाश्चात्य संचार सिद्धांतों के साथ-साथ हमारी अपनी भारतीय संचार परंपरा भी अत्यंत समृद्ध और वैज्ञानिक रही है। व्यावहारिक कार्यों के माध्यम से विद्यार्थी अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक संचार को गहराई से समझ सकते हैं। यह बातें छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक परियोजना के समापन पर कही।

विश्वविद्यालय में एमए पत्रकारिता और पीजी डिप्लोमा पत्रकारिता के प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने ‘भारतीय संचार परंपरा’ विषय पर परियोजना के तहत शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय लोक कलाकारों, कला प्राध्यापकों और मीडिया व कला क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोगों के साक्षात्कार लिए। इसके माध्यम से उन्होंने भारतीय संचार परंपरा के विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया।

परियोजना के तहत विद्यार्थियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर कार्य सौंपे गए थे। एक समूह ने ऐतिहासिक खेरेश्वर मंदिर का भ्रमण कर उसके इतिहास, जनआस्था और आध्यात्मिक संचार से जुड़े पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार की। वहीं, अन्य समूहों ने शहर की लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत पर जानकारी जुटाई। विद्यार्थियों ने अपने क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान किए गए साक्षात्कार, सर्वेक्षण और अन्य कार्यों की प्रस्तुति भी दी।

विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि फील्ड वर्क विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के साथ उनमें शोधपरक सोच विकसित करने में सहायक है। ऐसे अनुभव उन्हें संवेदनशील और सजग पत्रकार बनने में मदद करते हैं।

परियोजना के समन्वयक डॉ. हरिओम कुमार ने कहा कि पत्रकारिता की वास्तविक सीख कक्षा के साथ-साथ क्षेत्र में काम करने से मिलती है। ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण और विशेषज्ञों के साक्षात्कार लेने से विद्यार्थियों में विषयवस्तु तैयार करने, साक्षात्कार लेने और रिपोर्टिंग जैसे कौशल विकसित होते हैं।

प्रस्तुतीकरण के दौरान प्रो. कौशल त्रिपाठी, डॉ. जितेंद्र डबराल, डॉ. ओमशंकर गुप्ता, डॉ. योगेंद्र पांडेय, डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. होईमावती, डॉ. विनय कुमार, प्रेम किशोर शुक्ला और सागर कनौजिया सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। विद्यार्थियों में नितेश, हर्ष, अभय, अश्विनी, प्रतिमा, शारन्या, अनुभव, नेहा, उन्नैजा, अनुष्का सेन और हिमांशु शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

Livevns.news Desk
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