झांसी : बेतवा में नाव पलटी, सगे भाई तेज बहाव में बहे

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झांसी : बेतवा में नाव पलटी, सगे भाई तेज बहाव में बहे


झांसी : बेतवा में नाव पलटी, सगे भाई तेज बहाव में बहे


मछली शिकारियों को देखने पहुंचे थे नदी किनारे, नाव लेकर गहराई में उतरना पड़ा भारी

झांसी, 08 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बरुआसागर थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह बेतवा नदी में दर्दनाक हादसा हो गया। पुराने नोटघाट रेलवे पुल के नीचे मछली के शिकारियों को देखने पहुंचे दो सगे भाई नाव पर सवार होकर नदी में उतर गए। कुछ दूरी पर गहराई में पहुंचते ही नाव डगमगाई और अचानक पलट गई। हादसे में सगे भाई तेज बहाव में बह गए। देर शाम तक दोनों का कोई सुराग नहीं लग सका। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम नदी में लगातार तलाश करती रही।

जानकारी के अनुसार, बरुआसागर थाने के पीछे रहने वाले मछली कारोबारी राजू रायकवार मंगलवार सुबह अपने दोनों बेटों महेन्द्र रायकवार (24) और मनीष रायकवार (20) के साथ पुराने नोटघाट पुल के पास पहुंचे थे। इसी दौरान पिता राजू किसी काम से वहां से चले गए। उनके जाते ही दोनों बेटे वहां रखी नाव को पानी में उतारकर नदी में चले गए। कुछ दूर जाने के बाद नाव तेज बहाव और गहराई की चपेट में आकर असंतुलित होकर पलट गई। दोनों भाई पानी में गिरकर बहते हुए नदी में आंखों से ओझल हो गए।

हादसे की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी प्रकाश सिंह, उपनिरीक्षक विशेष पाल सिंह समेत पुलिस टीम मौके पर पहुंची। गोताखोरों की मदद से नदी में तलाश शुरू कराई गई। मध्य प्रदेश पुलिस को भी घटना की जानकारी दी गई। देर शाम एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची और नाव के जरिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। समाचार लिखे जाने तक दोनों की तलाश जारी थी।

पिता ने मना किया था, फिर भी नाव लेकर चले गए

पिता राजू रायकवार ने बताया कि उनका मछली पकड़ने का ठेका है और इसी सिलसिले में वह बेटों के साथ नदी किनारे आए थे। उन्होंने दोनों बेटों को नाव लेकर नदी में जाने से मना किया था। कुछ देर के लिए दूर जाने के बाद लौटे तो दोनों नाव लेकर नदी में जा चुके थे। हादसे की खबर मिलते ही पिता बदहवास हो गए। उन्होंने बिलखते हुए कहा कि,“साहब, हम बर्बाद हो गए हैं। पूरा घर उजड़ गया।”

नदी में लापता भाइयों में महेन्द्र शादीशुदा था और उसके दो छोटे बच्चे हैं। हादसे के बाद मां अंजू रायकवार समेत पूरे परिवार का रो-रोकर बेहाल है। परिजन देर शाम तक नदी किनारे दोनों भाइयों के मिलने की आस लगाए बैठे रहे।

प्रत्यक्षदर्शी मछुआरों राजाराम और बाबूलाल ने बताया कि नाव पलटने के बाद दोनों भाई मदद के लिए चीख रहे थे। लेकिन नदी का बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते दोनों पानी में बह गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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