बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से 'मैं भी स्वदेशी: समर्थक' अभियान का शुभारम्भ, स्वदेशी अपनाने का लिया संकल्प

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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से 'मैं भी स्वदेशी: समर्थक' अभियान का शुभारम्भ, स्वदेशी अपनाने का लिया संकल्प


बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से 'मैं भी स्वदेशी: समर्थक' अभियान का शुभारम्भ, स्वदेशी अपनाने का लिया संकल्प


झांसी, 01 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलम्बी भारत अभियान के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के वृंदावनलाल वर्मा सभागार से कानपुर प्रान्त स्तरीय मैं भी स्वदेशी: समर्थक जन-जागरण अभियान का शुभारम्भ किया गया। 1 अगस्त से 20 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से पूरे कानपुर प्रान्त में स्वदेशी के प्रति जन-जागरण, स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कानपुर प्रान्त के विभाग प्रचारक मनोज ने की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का संकल्प ले, तो स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनेगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता एवं स्वदेशी जागरण मंच की केंद्रीय प्रचार टोली के सदस्य डॉ. विजय सिंह ने कहा कि विकसित भारत का मार्ग स्वदेशी चिंतन से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी का अर्थ केवल भारतीय वस्तुओं का उपयोग करना नहीं, बल्कि देश की प्रतिभा, तकनीक, उद्यमिता और संसाधनों पर विश्वास करना भी है। जब नागरिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं तो इसका सीधा लाभ किसानों, कारीगरों, लघु उद्योगों और स्थानीय उद्यमियों को मिलता है। उन्होंने युवाओं से स्वदेशी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

प्रांत संयोजक सुदीप खरे ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 1 से 20 अगस्त तक शिक्षण संस्थानों, बाजारों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक जनसंपर्क किया जाएगा। अभियान के दौरान नागरिकों को स्वदेशी अपनाने और मैं भी स्वदेशी: समर्थक बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

प्रांत समन्वयक डॉ. प्रवीण अग्निहोत्री ने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक अवधारणा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी से सहयोग की अपील की।

कार्यक्रम का संचालन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रो. मुन्ना तिवारी ने किया। उन्होंने बताया कि शोधपीठ भारतीय ज्ञान परंपरा, एकात्म मानव दर्शन, स्वदेशी चिंतन और आत्मनिर्भर भारत के विचारों को समाज और युवाओं तक पहुंचाने के लिए निरंतर संगोष्ठियों, व्याख्यानमालाओं, छात्र संवाद, शोध परिचर्चाओं और जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

इस अवसर पर केशव वाजपेई, लाल सिंह, राकेश कुशवाहा, कोमल तिवारी, डॉ. राघवेंद्र द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविदों, प्रबुद्ध नागरिकों, विद्यार्थियों, उद्यमियों और स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सभी ने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वदेशी को जन-आंदोलन बनाकर ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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