मां की लाश के पास रोती रही आठ साल की मासूम, पत्नी का शव घर ले जाने के लिए पति के पास नहीं थे पैसे
झांसी, 04 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर पत्नी का शव लिए एक बेबस पति बैठा था, जबकि पास ही उसकी करीब आठ साल की बेटी नंदनी मां की लाश देखकर रो रही थी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि पति के पास पत्नी का शव घर ले जाने तक के पैसे नहीं थे। बाद में एक सिपाही और मेडिकल कॉलेज स्टाफ की पहल से परिवार को मदद मिल सकी।
मामला मध्य प्रदेश के ओरछा का है।
ओरछा निवासी राहुल आदिवासी अपनी पत्नी रामवती का इलाज कराने स्थानीय अस्पताल पहुंचे थे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। राहुल के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और उनके पास झांसी आने-जाने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे। परिवार की मजबूरी देखते हुए ओरछा के डॉक्टर ने आर्थिक मदद कर टैक्सी की व्यवस्था कराई। इसके बाद राहुल पत्नी और बेटी के साथ झांसी पहुंचे।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में रामवती को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पत्नी की मौत के बाद राहुल के सामने शव को ओरछा ले जाने की समस्या खड़ी हो गई। उसके पास एंबुलेंस या शव वाहन का किराया देने तक के पैसे नहीं थे। वह पत्नी का शव स्ट्रेचर पर लेकर इमरजेंसी के बाहर बैठ गया। पास में उसकी बेटी नंदनी मां के शव को देखकर रोती रही।
इसी दौरान वहां तैनात एक सिपाही की नजर परिवार पर पड़ी। उसने राहुल से बातचीत कर पूरी स्थिति जानी और मदद के लिए सामाजिक संस्था से संपर्क किया। संस्था की ओर से बिना शुल्क शव को ओरछा स्थित घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। अंतिम संस्कार में भी सहयोग किया गया।
सीएमएस का है कहना
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन माहौर ने बताया कि महिला को इमरजेंसी में मृत अवस्था में लाया गया था। जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव लेकर इमरजेंसी के बाहर कुछ देर बैठे रहे। स्टाफ की नजर पड़ने पर मामला उनके संज्ञान में आया। उन्होंने बताया कि स्टाफ और अन्य लोगों की मदद से तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कर शव को घर भिजवाया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

