सुखनई नदी के अचानक उफान पर पेड़ बना सहारा, रेस्क्यू में ड्रोन से तलाशकर 08 घंटे बाद सुरक्षित निकले चार मछुआरे

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सुखनई नदी के अचानक उफान पर पेड़ बना सहारा, रेस्क्यू में ड्रोन से तलाशकर 08 घंटे बाद सुरक्षित निकले चार मछुआरे


सुखनई नदी के अचानक उफान पर पेड़ बना सहारा, रेस्क्यू में ड्रोन से तलाशकर 08 घंटे बाद सुरक्षित निकले चार मछुआरे


झांसी, 27 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित मऊरानीपुर की सुखनई नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ के बीच पेड़ पर फंसे चार ग्रामीणों को पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम ने करीब आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आधुनिक ड्रोन तकनीक और रस्सी के सहारे चलाए गए इस जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन में चारों ग्रामीणों की जान बच गई। सफल अभियान के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली और बचाव दल का आभार जताया।

जानकारी के अनुसार गांधीगंज निवासी मंगल पुत्र भगवान दास, बल्लू पुत्र पूरन, कालीचरण पुत्र जगन और रिंकू पुत्र अमरचंद गुरुवार सुबह करीब छह बजे सुखनई नदी में बने चेकडैम के पास मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान पहाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण सुबह करीब आठ बजे नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि चारों ओर पानी फैल गया। जान बचाने के लिए चारों ग्रामीण पास के एक ऊंचे पेड़ पर चढ़ गए।

सूचना मिलते ही करीब नौ बजे मऊरानीपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। नदी के विकराल बहाव को देखते हुए अधिकारियों ने तत्काल एसडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीम को बुलाया। सीधे नाव के जरिए ग्रामीणों तक पहुंचना जोखिम भरा होने के कारण बचाव दल ने रणनीति बदलते हुए ड्रोन की मदद ली।

ड्रोन के जरिए पेड़ पर फंसे ग्रामीणों की सटीक लोकेशन और आसपास की स्थिति का जायजा लिया गया। इसके बाद किनारे से मजबूत रस्सी के जरिए संपर्क स्थापित कर ग्रामीणों तक लाइफ जैकेट पहुंचाई गई। एसडीआरएफ जवानों ने तेज बहाव के बीच बेहद सावधानी से रेस्क्यू शुरू किया।

करीब आठ घंटे तक पेड़ पर फंसे रहने के बाद देर शाम चारों ग्रामीणों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सफल रेस्क्यू के बाद एसडीएम मऊरानीपुर मनोज भारती ने लोगों से अपील की कि भारी बारिश के दौरान नदी, नालों और चेकडैम के आसपास जाने से बचें। उन्होंने कहा कि उफनते जलस्रोतों के पास थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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