अमरनाथ यात्रा फिटनेस सर्टिफिकेट में फर्जीवाड़ा : जिला अस्पताल में बिना शुल्क रसीद के बना दिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, रजिस्ट्रेशन न मिलने पर खुली पोल

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अमरनाथ यात्रा फिटनेस सर्टिफिकेट में फर्जीवाड़ा : जिला अस्पताल में बिना शुल्क रसीद के बना दिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, रजिस्ट्रेशन न मिलने पर खुली पोल


झांसी, 22 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में जिला अस्पताल में अमरनाथ यात्रा के लिए जारी किए जाने वाले फिटनेस प्रमाण पत्रों में फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर बिना रसीद और पंजीकरण के ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए।

जानकारी के अनुसार, अमरनाथ यात्रा के लिए स्वास्थ्य परीक्षण हेतु जिला अस्पताल में एक तय प्रक्रिया लागू है। इसके तहत 68 रुपये की रसीद कटवाने के बाद आवेदक का विभिन्न चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। परीक्षण पूरा होने पर फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और उसका विवरण अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसी रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर यात्रा के लिए आगे पंजीकरण संभव होता है।

मामले में खुलासा तब हुआ जब हेल्पिंग टैक्स पर कार्यरत ऑपरेटर संजय यादव ने ऋषभ साहू और प्रशांत साहू को अपना रिश्तेदार बताते हुए बिना किसी शुल्क और रसीद के डॉक्टर मुकेश राजपूत से फिटनेस प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए। इतना ही नहीं, उनका फिटनेस सर्टिफिकेट भी तैयार कर दिया गया। लेकिन जब आवेदन फार्म में रजिस्ट्रेशन नंबर भरने की बारी आई तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया, क्योंकि रजिस्टर में उनका कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं था।

इस पर आवेदक ने तत्काल सीएमएस को शिकायत की और डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को बुला लिया। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है। इस घटना ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चिकित्सक बोले,रिश्तेदार बताकर करवाए हस्ताक्षर

जब मामले की जानकारी डॉ. मुकेश राजपूत को हुई तो वह सकते में आ गए। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें संजय यादव ने यह कहकर हस्ताक्षर करवाए कि शुल्क रसीद प्रक्रिया में है।

न रसीद कटी,न रजिस्टर में दर्ज : सीएमएस

सीएमएस डॉ. आरके सक्सेना ने स्पष्ट किया कि अमरनाथ यात्रा के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने की एक निश्चित प्रक्रिया है, जिसका पालन अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि संबंधित दोनों व्यक्तियों के नाम से न तो कोई रसीद कटी है और न ही रजिस्टर में कोई प्रविष्टि दर्ज है।

प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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